केदार सिंह परिहार का निधन….

छत्तीसगढ़ की साहित्यिक दुनिया को गहरा आघात पहुँचा है। सुप्रसिद्ध रचनाकार, “छत्तीसगढ़ ल छांव करे बर मैं छानी बन जातेंव” जैसी अमर पंक्तियों के सृजनकर्ता, छत्तीसगढ़ रत्न एवं क्षत्रिय समाज के पुरोधा आदरणीय श्री केदार सिंह परिहार अब हमारे बीच नहीं रहे।

आज प्रातः उन्होंने इस नश्वर संसार को त्यागकर स्वर्गलोक की यात्रा कर ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे।

उनका अंतिम संस्कार आज दोपहर 1 बजे उनके गृहग्राम केसतरा में संपन्न होगा। वे श्री हरि सिंह, विनिया सिंह एवं प्रतिज्ञा सिंह के श्रद्धेय पिता थे।

श्री परिहार का जाना न केवल परिवार के लिए, बल्कि पूरे साहित्यिक जगत और समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।

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