नगरीय विकास में लोरमी आगे, मुंगेली पीछे! लोगों की उम्मीदें अब सवालों में बदली…

मुंगेली। प्रदेश के डिप्टी सीएम और नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव के गृह जिले मुंगेली को लेकर लोगों की उम्मीदें अब सवालों में बदलती नजर आ रही हैं। मंत्री बनने के बाद स्थानीय नागरिकों को उम्मीद थी कि 77 साल पुरानी मुंगेली नगर पालिका परिषद का तेजी से विकास होगा, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है।

नगरीय विकास के मामले में अरुण साव का विधानसभा क्षेत्र लोरमी, मुंगेली से आगे निकलता दिख रहा है। विकास कार्यों और बजट आवंटन को लेकर लोरमी नगर पालिका परिषद में किसी तरह की कमी नहीं है, जबकि मुंगेली नगर पालिका अपेक्षाकृत पिछड़ती नजर आ रही है।

बता दें कि, अरुण साव मुंगेली के ही हैं और उनकी शिक्षा दीक्षा यहीं पूरी हुई। बावजूद इसके, मुंगेली के लोगों का कहना है कि मंत्री बनने के बाद भी नगर पालिका क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। स्थानीय नागरिकों में यह चर्चा आम है कि मुंगेली नगर पालिका में कांग्रेस का अध्यक्ष होना उपेक्षा की एक बड़ी वजह हो सकता है।

– लोरमी को मिल रहा भरपूर बजट

लोरमी पहले नगर पंचायत था और कुछ साल पहले नगर पालिका परिषद बना है, वहीं वहां सड़कों, नालियों, सौंदर्यीकरण और अन्य विकास कार्यों के लिए लगातार बजट उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके उलट, लंबे समय से नगर पालिका परिषद रहने के बावजूद मुंगेली में कई बुनियादी सुविधाओं के लिए लोग अब भी संघर्ष कर रहे हैं।

मुंगेली के नागरिकों का कहना है कि जब प्रदेश का नगरीय निकाय मंत्री खुद इसी जिले से आते हैं, तो यहां विकास की रफ्तार सबसे तेज होनी चाहिए थी। लेकिन मौजूदा हालात में मुंगेली, लोरमी नगर पालिका से पीछे छूटता दिख रहा है।

इसी वजह से लोगों में निराशा बढ़ रही है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नगरीय निकाय मंत्री का गृह नगर होने के बावजूद मुंगेली को राजनीतिक कारणों से नजरअंदाज किया जा रहा है? या आने वाले समय में नगरीय विकास की तस्वीर बदलेगी?

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