कोई जिम्मेदार पुलिस का अधिकारी होता तो शायद चोर घेराबंदी कर पकड़ा जा सकता था…

क्या यही है मुंगेली की विश्वसनीय पुलिस की कर्तव्यपरायणता?

मुंगेली। पुलिस की अति महत्वपूर्ण बैठक,क्राइम मीटिंग प्रायः हर जिले में होती है मगर मुंगेली जिले में अजब स्थिति तब देखने को मिली जब शहर भीतर एक राष्ट्रीयकृत बैंक में बड़ी चोरी की घटना हो जाय तब थाना प्रभारी सहित सभी जिले अधिकारी किसी मीटिंग के हवाले से न हो।
आज अगर सिटी कोतवाली में यदि थाना प्रभारी की आवश्यक बैठक में उपस्थित होना जरूरी था तब कोई और प्रभारी कोतवाली में क्यों नही था। क्यों जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारी को लोग जब क्राइम की सूचना देते रहे तब आपात स्थिति में मोबाइल क्या रिसिव नही किया जाना था? मगर आवश्यक बैठक के हवाले से सभी ने फोन उठाना मुनासिब नही समझा और देखते ही देखते चोर पुलिस की पहुंच से बाहर हो निकला। अब फिर क्या देर से पहुंची टीम का क्या कार्यवाही होगा यह सर्वविदित है। पुलिस अब सबूत देख रही है सीसीटीवी कैमरे फुटेज सोशल मीडिया में बगरा रही है और आमजनमानस से एक अपील की जा रही है। मतलब अब समझा जाए तो ये सब ऊपर अपनी महज किसी अपराध में सक्रियता दिखाने का एक ढकोसला ही समझ आ रहा है वहीं दूसरी ओर देर शाम अब स्टेट बैंक परिसर से 61 हजार रुपये चोरी हो जाने वाले पीड़ित पक्ष अब कोतवाली रिपोर्ट रजिस्टर कराने जुटा हुआ है। चर्चा जोरों से यह भी है कि अब पुलिस का काम सिर्फ लाठी पीटने जैसा ही है। मगर क्या करे यही मुंगेली जिले में पुलिस की व्यवस्था है।

एसडीओपी दफ्तर के पीछे और हुए चोरी का नही लगा पता

बता दें जबसे नई पुलिस व्यवस्था है तबसे अपराधिक गतिविधियों में इजाफा देखने को मिल रहा है। सट्टा, जुआं, शराबखोरी तो वैसे भी मुंगेली जिले के गांव गांव मानो पुरानी पहचान है। उसके अलावा शहर में 100 दिनों भीतर तीन चार घरो में हुए लाखों के नगदी, जेवरात, समान के करीब भी पुलिस का न पहुंच पाना समझ से परे है।

बदहाल यातायात व्यवस्था, ट्रैफिक पुलिस नही

शहर भीतर दो प्रमुख चौक चैराहो में बाकायदा रिकॉर्ड अनुसार ट्रैफिक पुलिस, सीसीटीवी सभी व्यवस्था है मगर हकीकत में आज भी लोग सिग्नल को समझ भी नही पा रहे है एकाध ट्रैफिक का जवान चौक के किनारे मोबाइल में कहीं मगन रहते है इनकी आंख तभी सक्रिय होती है जब कोई तस्करी अथवा बड़े भारी वाहनो के आवाजाही होते है जिसको भी चौक से कुछ दूर आगे रोक खर्चा पानी ले रवाना किए जाने ट्रैफिक पुलिस का बड़ा रोल रहता है। इन सबके बावजूद प्रतिदिन टीआई एसपी को आल इज वेल और एसपी उच्च अधिकारियों को खैरियत जवाब देते रह जिले का संचालन कर रहे हैं।