रायपुर : कांग्रेस से विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद से ही अन्तर्कलह में उलझी भाजपाई सियासत में बुधवार को अंतिम बड़ी उठा-पटक देखने को मिली। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के बाद आज नेता प्रतिपक्ष भी बदल दिया। बाकायदा संगठन, प्रदेश प्रभारी और क्षेत्रीय मंत्री (संगठन) समेत सभी 14 विधायकों की मौजूदगी में पार्टी विधायक दल के नए नेता के रूप में नारायण चंदेल के नाम पर सहमति बनी। टीआरपी ने पहले ही इसकी जानकारी दे दी थी।
जानकारी के मुताबिक तक़रीबन 2 घंटे से ज़्यादा देर तक चली बैठक फिर विचार-मंथन के बाद विधायकों से उनकी पसंद पूछी गई और नाम बंद लिफाफे में दाल दिया गया था। बता दें कि नेताप्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक की जगह 4 नए नामों की चर्चा थी। जिसमे:नारायण चंदेल, अजय चंद्राकर, शिवरतन शर्मा और बृजमोहन अग्रवाल थे। पार्टी हलकों में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह का नाम भी सामने आया था। बैठक ख़त्म होने के बाद पुनः प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी ने नाम का एलान किया।
इन नामों पर चर्चा की ये वजह
चर्चा है कि बदलाव का सिलसिला यही नहीं थमेगा संगठन के और भी प्रमुख चेहरों को बदला जाएगा। साल 2023 के चुनावों में भाजपा एक नई टीम खड़ी कर सकती है। इस बैठक में शामिल होने और प्रदेश संगठन की संरचना को लेकर चर्चा करने प्रदेश की प्रभारी डी पुरंदेश्वरी, प्रदेश के सह प्रभारी नितिन नवीन और संगठन के महामंत्री अजय जामवाल भी मौजूद रहे।
बृजमोहन और शिवरतन शर्मा संगठन में सक्रिय होने और अपनी वरिष्ठता की वजह से चर्चा में हैं। चंद्राकर और चंदेल पर उम्मीद इस वजह से मानी जा रही थी क्योंकि दोनों ओबीसी वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने अचानक अरुण साव को प्रदेश अध्यक्ष बना कर पहले भी सभी को चौंका दिया है । वैसे नेताप्रतिपक्ष के तौर पर अजय चंद्राकर बेबाक होने की वजह से भी उपयुक्त माने जा रहे थे। हालाकि विधानसभा चुनाव को महज़ 14 महीने बकाया हैं। ऐसे में भाजपा अनुभवी और आक्रामक दोनों टाइप के नेता को नामजद करना चाह रही थी। इसलिए आक्रामकता में अजय तो पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष रहे नारायण चंदेल अनुभवी, के साथ साथ मुद्दों को उठाना भी जानते है फिर ओबीसी वर्ग में अजय से ज्यादा लोकप्रिय है।