रायपुर/गरियाबंद। पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में लम्बे समय से गरियाबंद जिले का एक विभाग सुर्खियों में बना हुआ है। सम्बंधित विभाग के बहुचर्चित प्रभारी अधिकारी के भ्रष्टाचार,कार्यवाही, स्थानान्तरण के लिए जिले के अलग अलग विकासखंड के लोग सड़क पर धरना प्रदर्शन उग्र आंदोलन कर चुके है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री कार्यालय में भी तथ्य पूर्ण शिकायत और पीएमओ ऑफिस से जांच कार्यवाही के लिए भी पत्र व्यवहार होने के बावजूद जिला प्रशासन मूकदर्शक मुद्रा में नजर आ रही है।
पिछली सरकार में जनप्रतिनिधि,लोकल लोगों के सांठगांठ और अब सत्ताधारी दल के पदाधिकारी लोगों को अपने साथ रख इस विभाग द्वारा रखरखाव जीर्णोद्धार के नाम पर लगभग 50 करोड़ से अधिक राशि अलग अलग टेंडर कर बंदरबांट की गई।
इस पूरे मामले में सूक्ष्मता से जानकारी लेकर इस बार सत्ता धारी दल के ही एक विधायक द्वारा विधानसभा में प्रश्न लगाने की तैयारी की जा रही है। संभवतः इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग,आदिवासी विभाग, स्वास्थ्य विभाग को जवाब देना कठिन हो सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि गंभीर भ्रष्टाचार की शिकायत एवं सड़क पर धरना प्रदर्शन उग्र आंदोलन के बावजूद अब तक राज्य सरकार ने इन तीन वर्षों में 6 कलेक्टर बदल दिए मगर विभाग में अंगद के पांव की तरह जमें अधिकारी पर अब तक ना कोई बड़ी कार्यवाही हुई और ना ही स्थानांतरण किया गया।
हाल ही में इसी जिले के एक विकासखंड के 150 राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले लोगों का समूह अपनी मूलभूत आवश्यकता की सुविधा मुहैया ना होने एवं जिला प्रशासन के लगातार उपेक्षा करने के चलते मुख्यमंत्री निवास घेराव करने पदयात्रा में राजधानी रायपुर पहुंचने वाले है।
अब देखना यह है कि आदिवासी बाहुल्य जिले गरियाबंद में विकास के नाम पर जिला प्रशासन एवं अनेक विभाग में लम्बे समय से जमें अधिकारियों पर राज्य सरकार क्या बड़ी कार्यवाही करती है।