
• झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के विधायकों को बसों से बाहर भेजा
रांची। झारखंड में राजनीतिक उठापटक जारी है। 27 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास से विधायकों को लेकर 3 बसें रवाना हुईं। इन बसों में सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के 36 विधायक हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद बस में सवार दिखे। उन्होंने बाकायदा सेल्फी ली। बताया जा रहा है कि खबर लिखे जाने तक विधायक खूंटी पहुंच गए। यहां विधायक एक गेस्ट हाउस में रुकेंगे। कहा जा रहा है कि खरीद-फरोख्त की आशंका के बीच विधायकों सुरक्षित जगह पर भेजा जा रहा है।
गेस्ट हाउस के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है। जानकारी के मुताबिक, यहां पर कुछ देर रुकने के बाद विधायकों को कहीं और शिफ्ट किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ या पश्चिम बंगाल भेजे जा सकते हैं विधायक
खबर आ रही है कि छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक होटल की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, होटल के कमरे भी बुक किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इन विधायकों को रायपुर शिफ्ट किया जा सकता है। एक कांग्रेस नेता ने न्यूज एजेंसी को बताया कि गठबंधन के विधायकों को छत्तीसगढ़ या पश्चिम बंगाल में भेजे जाने की सभी व्यवस्थाएं की गई हैं।
वहीं, हालात के मद्देनजर JMM ने पहले ही सभी विधायकों का हस्ताक्षर समर्थन पत्र पर करवा लिए हैं। JMM और कांग्रेस दोनों पार्टियों के विधायकों से ये दस्तखत करवाए गए हैं। JMM सूत्रों की मानें तो 42 विधायकों का समर्थन पत्र बनकर पहले से तैयार कर लिया गया है।
सीएम पर आरोप
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में लाभ लिया। इसके लिए उन्होंने खदान का पट्टा हासिल किया। इधर, सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने का नोटिफिकेशन 27 अगस्त को किसी भी समय चुनाव आयोग की तरफ से जारी किया जा सकता है। राज्यपाल रमेश बैस ने CM हेमंत सोरेन की सदस्यता रद्द कर दी है। इलेक्शन कमीशन की ओर से भेजी गई अनुशंसा पर ये कार्रवाई की है।
आगे 3 संभावनाएं
चुनाव आयोग का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद राज्यपाल CM हेमंत सोरेन को अपने पद से इस्तीफा देने के लिए कह सकते हैं।
सोरेन की सदस्यता जाने के बाद गवर्नर राज्य के सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का न्योता देंगे। फिलहाल JMM अभी झारखंड विधानसभा में सबसे बड़ा दल है। ऐसे में नियम के अनुसार गवर्नर को सरकार बनाने का पहला मौका JMM को ही मिलेगा।
सोरेन इस्तीफा देकर फिर से मुख्यमंत्री बन सकते हैं। ऐसे में उन्हें 6 महीने के भीतर दोबारा चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचना होगा।