विशुद्ध छोटे- छोटे टुकड़े खरीदी-बिक्री ना होने से लोग हो रहे परेशान




मुंगेली। ‘नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली’ ये कहावत अभी मुंगेली के जमीन खरीदी बिक्री में गैर वाजिब ढंग से लगी रोक में फिट लग रहा है। मार्च का आखरी महीना जहां सरकार के फरमान अनुसार अवकाश के दिनों में भी राजस्व प्राप्ति के लिए खुली रखे जाने का आदेश है बावजूद अभी छोटे छोटे रखबो की टुकड़े वार रजिस्ट्रियां रोक दी गई है जिससे मार्च के महीनों में हर दिन राजस्व का नुकसान हो रहा है।
मालूम हो दो दशक से अरबों खरबो के अवैध प्लाटिंग के अनाप शनाप ढर्रे ने पूरे नगर पालिका के बसाहटों को प्रभावित किया और अब शहरी क्षेत्र के इन गिरोहों ने अवैध प्लाटिंग का भरपूर मजा ले लिया तब खानापूर्ति के लिए पिछले सप्ताह पुराने आदेश,शिकायत के हवाले से अवैध प्लाटिंग की रजिस्ट्रियां रोकी गई है।
निःसंदेह अभी भी अवैध प्लाटिंग की खरीदी बिक्री पर प्रतिबंध होना जायज है मगर शहरी क्षेत्र के बहुत से ऐसे भू-खंड है जिनका अवैध प्लाटिंग या कहे पहली बार कोई आर्थिक मजबूरीवश अपनी लगानी जमीन का टुकड़ा बेचना पड़ रहा हो उसमे भी पंजीयक कार्यालय द्वारा नगर पालिका के सीएमओ के लेटर जिसमे अवैध प्लाटिंग की खरीदी बिक्री रोकने लिखा गया है उसके हवाले से जमीनों की ख़रीदी बिक्री पर रोक होना बताया जा रहा है।
क्या लगानी जमीन की विशुद्ध खरीदी बिक्री पर रोक लगाने अथवा बाधित कर मालिकाना हक की जायदाद क्रय-विक्रय अथवा शासन के राजस्व में हानि पहुंचाने का जो सिलसिला मुंगेली पंजीयक कार्यालय में चल रहा है वो कहां तक सही है । इन सबके बावजूद क्षेत्रीय विधायक, शहर के नगर सरकार के प्रतिनिधि अथवा विपक्ष के नेता सब मौन मूकदर्शक मुद्रा में है। अवैध प्लाटिंग के हवाले से तुगलकी फरमान अथवा हठधर्मिता पूर्ण निर्णय से बहुत से लोग अपनी जमीनों की खरीदी बिक्री नही कर पा रहे हैं। मुंगेली एसडीएम भी इस मामले का निराकरण करने कोई दिलचस्पी नही दिखा रहे हैं।
वैध वारिसान की जमीनों का हिस्सा जरूरत अनुसार खरीदी बिक्री नही होने के कारण अनेक घर परिवार के मेडिकल इमरजेंसी, शादी ब्याह अन्य काम रुक रहे है। सरकार के भी राजस्व के लिए आकस्मिक पंजीयक कार्यालय खुले रख रजिस्ट्री करने के आदेश भी कचरे के टोकरी में डाल दिए गए है।
महत्वपूर्ण यह भी है कि पंजीयक कार्यालय में जमीन की रजिस्ट्री करवाने के लिए पहुंच रहे खरीदारों और विक्रेताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले दो सप्ताह से अवैध प्लाटिंग या कहे प्लॉट कटुआ गिरोह के आतंक के बाद जमीनों की रजिस्ट्री के लिए स्लॉट ही बुक नहीं हो रहे हैं इससे रजिस्ट्री कम हो पा रही हैं और शासन को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
जानकारी के अनुसार पंजीयक कार्यालय में औसतन प्रतिदिन 30 रजिस्ट्री होती हैं, इससे शासन को लाखों रुपए का राजस्व प्रतिदिन मिलता रहा है। मगर अवैध प्लाटिंग के हवाले से कुछ नामजद लोगों की सूची,खसरा अनुसार रजिस्ट्री रोकने के आदेश के बाद सभी प्रकार की रजिस्ट्रियां पंजीयक कार्यालय में रोक दी गई है। सुबह से ही लोग स्लॉट बुक करवाने के लिए पहुंच जाते हैं, लेकिन पंजीयक द्वारा मौखिक म्युनिसिपल सीएमओ के फरमान के अनुसार रजिस्ट्री बंद होना बताया जा रहा है। जिसके कारण लोग बेवजह परेशान हो रहे है। जिला प्रशासन को चाहिए कि विशुद्ध स्वामित्व की अवैध प्लाटिंग से मुक्त जमीनों की खरीदी बिक्री जारी कराई जाए ताकि राज्य शासन को वांछित राजस्व भी मिल सके।