हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
नईदिल्ली। केरल हाई कोर्ट ने एक बड़ी और अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि अगर आरोपी पीड़िता के थाइज यानी जांघो के बीच भी सेक्सुअल एक्ट यानी गलत हरकत करता है, तो उसे भी भारतीय दंड संहिता में मौजूद धारा 375 के तहत परिभाषित बलात्कार के समान ही माना जाएगा।
केरल हाईकोर्ट के जज विनोद चंद्रन और ज़ियाद रहमान की पीठ ने एक ऐतिहासिक फैसले में व्यवस्था दी है कि अगर एक महिला के साथ रेप के उद्देश्य से उसके जांघों को गलत तरीके से पकड़ा जाता और संबंध नहीं भी बनाया जाता है, तो भी उस क्रिया को आर्टिकल 375 के तहत रेप ही माना जायेगा।
हाईकोर्ट ने यह फैसला एक व्यक्ति की अपील पर सुनाया था, जिसे निचली अदालत ने एक बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न करने के मामले में उम्रकैद की सजा सुनायी थी। अभियुक्त पर यह आरोप था कि उसने नाबालिग के जांघों को गलत तरीके से पकड़ा और छेड़छाड़ की।
व्यक्ति पर अपनी 11 साल की पड़ोसी के रेप का आरोप था। व्यक्ति ने नाबालिग बच्ची से बार-बार विभिन डिग्रियों का यौन उत्पीड़न किया था।पेट में लगातार दर्द के बाद पीड़िता अपनी मां के साथ एक चिकित्सा शिविर में गई जहां जांच के बाद यह घटना सामने आई थी। बाद में चाइल्ड लाइन ऑफिशयल्स की मदद से केस दर्ज कराया गया और आरोपी शख्स को गिरफ्तार किया गया। कोर्ट ने इस शख्स को उम्रकैद की सजा दी। सजा के खिलाफ आरोपी शख्स ने हाईकोर्ट में नई अर्जी डाली और सवाल किया कि थाइज के गैप के बीच पेनेट्रेशन रेप कैसे हो सकता है।
कोर्ट ने बलात्कार की परिभाषा को विस्तार दिया है जिसके तहत यह बताया गया है कि महिलाओं के साथ किया गया यौन व्यवहार जो उसकी मर्जी से ना किया जा रहा हो वह बलात्कार की श्रेणी में आ सकता है भले ही उसमें शारीरिक संबंध बनाया गया हो या नहीं बनाया गया हो. गलत तरीके से छूना भी बलात्कर की श्रेणी में आ गया है।