शाकद्वीपीय ब्राम्हण समाज ने मनाई सूर्य सप्तमी…हवन,आहुति के बाद निकाली भव्य शोभायात्रा

रायपुर। अम्बा देवी मंदिर प्रांगण में सूर्य सप्तमी धूमधाम से मनाई गई। परंपरा अनुसार विधिवत हवन पूजन कर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पूर्णाहुति के बाद भगवान सूर्य का छायाचित्र वाहन पर सुसज्जित कर शोभायात्रा निकाली गई। मंदिर परिसर से शोभायात्रा निकलकर मुख्य मार्ग से होते हुए वापस मंदिर पहुंची। सामाजिक भोजन प्रसादी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भव्य सूर्य मंदिर निर्माण का भूमिपूजन किया गया।

श्री शाकद्वीपीय ब्राम्हण समाज ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेंद्र शर्मा , उपाध्यक्ष सुमित शर्मा, सचिव श्रवण शर्मा सहित समाज के अन्य गणमान्य नागरिक एवं महिला शक्ति की उपस्थिति में सूर्य मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी गई। आयोजन में मौजूद सामाजिक सदस्यों ने अपने हाथों से एक एक ईंट रखकर मंदिर निर्माण का शुभारंभ किया। दानदाताओं के सहयोग से मंदिर निर्माण शीघ्र पूरा करने का संकल्प लिया गया।

हवन में मुख्य यजमान कदम राज पांडेय एवं अन्य यजमान श्रवण शर्मा, खुशाल चंद शर्मा, रूपेश शर्मा,विजय शर्मा, विक्की शर्मा, मनीष शर्मा, ललित शर्मा, गोपाल शर्मा सपत्नीक शामिल हुए और पूजन हवन किया। समाज के सदस्य पंडित जितेंद्र शर्मा एवं उनके पुत्र गोपाल शर्मा ने मंत्रोच्चार कर पूजन विधि संपन्न कराई।

सूर्य सप्तमी आयोजन में समाज के वरिष्ठ राधेश्याम शर्मा, विजय शर्मा,लाला भैया, हरनारायण शर्मा, राजेन्द्र शर्मा, राजेश सुजानगढ़ वाले,अशोक शर्मा, गिरधर शर्मा, पुरुषोत्तम ( पोषी) शर्मा, भगत शर्मा, देवीदयाल शर्मा, दिलीप शर्मा, रमेश शर्मा, राजेश शर्मा, हरीश शर्मा, विजय शर्मा, दीनदयाल (राजू ) शर्मा, विकास शर्मा, पीयूष शर्मा, संदीप शर्मा , मोहन बंटी शर्मा, धीरेंद्र शर्मा, सहित सामाजिक सदस्यों की उपस्थिति ने सूर्य सप्तमी उत्सव की शोभा बढ़ाई।

श्री शाकद्वीपीय ब्राम्हण समाज के अध्यक्ष जितेंद्र शर्मा के अनुसार
सूर्य देव ही ऐसे देवता हैं, जिन्हें भक्तगण साक्षात देख सकते हैं। शाकद्वीपिय ब्राह्मण सूर्य देवता को अपना इष्टदेव मानते हैं। विश्वभर में जहां कहीं भी शाकद्वीपिय ब्राह्मण निवास कर रहे हैं वहां माघ शुक्ल की सप्तमी तिथि पर ‘सूर्य सप्तमी’ महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। राजधानी समेत छत्तीसगढ़ के अनेक शहरों में भी सूर्य सप्तमी महोत्सव की धूम रही। खासकर राजनांदगांव, बालोद आदि शहरों में भी सूर्य सप्तमी उत्सव मनाया गया।

अंबा मंदिर में 100 साल से हो रही पूजा

श्रीशाकद्वीपिय ब्राह्मण समाज के नेतृत्व में पिछले 100 सालों से माघ शुक्ल सप्तमी तिथि पर सूर्यदेव की पूजा की जा रही है। सूर्यदेव ही एकमात्र ऐसे देव हैं, जिनका प्रत्यक्ष दर्शन किया जा सकता है। सृष्टि के आरंभ से लेकर अंत तक सूर्यदेव विद्यमान रहेंगे। चारों युग में भगवान के सभी अवतारों के काल में भी सूर्यदेव की पूजा होती आई है और युगों युगों तक पूजा होती रहेगी।

महोत्सव के हैं कई नाम

सूर्य की उपासना का पर्व माघ शुक्ल सप्तमी को कई नामों से पुकारा जाता है। इसे अचला सप्तमी, रथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी, भानु सप्तमी, अर्क सप्तमी आदि नामों से संबोधित किया जाता है।

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