बिलासपुर । छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के “रजत जयंती वर्ष“ को बिलासपुर जिले में विशेष उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश में महिला एवं बाल विकास विभाग बिलासपुर द्वारा जिले के समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों में “पोषण मेला” का आयोजन किया गया। जिसमें शहरी क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 143 में विविध आयोजन हुए।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सीता शुक्ला ने बताया कि रजत जयंती अवसर पर आयोजित हो रहे विविध कार्यक्रम आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित पोषण संबंधी गतिविधियों का एक अभियान है, जो 1 सितंबर से 30 सितंबर 2025 तक चलेगा। इस दौरान बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य जांच, पोषण परामर्श, कुपोषण मुक्ति के उपाय, बाल मेला, और पोषण जागरूकता जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
लोगों को पोषण और स्वास्थ्य के महत्व के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम में विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनमें वजन त्योहार, पोषण प्रदर्शन एवं स्थानीय खाद्य प्रदर्शनी, स्वास्थ्य जांच हेतु महतारी हेल्थ कैंप, पोषण परामर्श एवं जागरूकता सत्र, पोषण संबंधित साहित्य का वितरण शामिल रहा। इन गतिविधियों ने न केवल लोगों को सही खानपान अपनाने की प्रेरणा दी, बल्कि समाज में एक स्वस्थ वातावरण निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। साथ ही विभिन्न गतिविधियाँ जैसे वाद-विवाद, चित्रकला एवं खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन कर प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया गया।
–मुख्य उद्देश्य
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करना एवं बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण को सुनिश्चित करके उन्हें सुरक्षित रखना।
–पोषण जागरूकता
लोगों को स्वस्थ जीवनशैली और सही खानपान के प्रति प्रेरित करना।
–कुपोषण मुक्ति
गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान कर उनका पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती और उपचार सुनिश्चित करना।
आयोजित की जाने वाली गतिविधियां।
–स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श
गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य जांच कैंप और पोषण संबंधी परामर्श सत्र।
–पोषण मेला
आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण मेला आयोजित करना, जिसमें खाद्य प्रदर्शनी भी शामिल हो सकती है।
–बाल मेला
बच्चों के लिए बाल मेला का आयोजन, जिसमें जागरूकता कार्यक्रम भी शामिल होते हैं।
–जागरूकता अभियान
पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े साहित्य का वितरण और जागरूकता सत्रों का आयोजन।
–सामुदायिक भागीदारी
कुपोषण मुक्ति के लिए समुदाय को जोड़ना।
–पोषण भी, पढ़ाई भी थीम पर कार्यक्रम
बच्चों के समग्र विकास के लिए पोषण और शिक्षा को एकीकृत करना।