गरियाबंद। बेईमान और भ्रष्ट अधिकारियों को ये गलतफहमी हो जाए कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता तो खुलकर भ्रष्टाचार करने लगते हैं। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के आदिवासी विभाग में जिला प्रशासन की सह में ही नियम विरुद्ध चहेते ठेकेदारों को काम दिया गया,नतीजतन वो काम ठेकदार मनमाने ढंग से कर लिए मगर विभागीय प्रक्रिया के बिना टेंडर की औपचारिकता भुगतान शिकायत और विरोध के बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
हालांकि विभाग दुहाई दे रहा कि ऐसा कोई काम धरातल में हुआ ही नहीं मगर मौजूदा साक्ष्य और कार्यस्थल पर मिल रहे इनपुट के आधार पर यह स्पष्ट है कि करोड़ों के काम बिना निविदा प्रक्रिया के बंदरबांट कर अपने मनमाफिक ठेकेदार को देकर भ्रष्ट पूर्ण कार्य करा लिया गया हालांकि अब यह जिला प्रशासन व आदिवासी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के गले का फांस बनता दिख रहा है बावजूद अब तक विभाग मौन,मूकदर्शक मुद्रा में नजर आ रहा है।
गरियाबंद आदिवासी विभाग में नियम विरुद्ध बिना टेंडर काम देने का तो यह पहला मामला सामने आया मगर पिछले 3 वर्षों के कार्यप्रणाली पर विरोध लगातार होते रहे। इस विभाग के अधिकारियों के भ्रष्टाचार की शिकायत जिला प्रशासन,राज्य सरकार के समक्ष ना होने के चलते एक अधिवक्ता ने साक्ष्य सहित भ्रष्टाचार की शिकायत बकायदा प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजी जहां से भी समय सीमा में जांच कार्यवाही के लिए निर्देशित किया गया मगर देश के मुखिया के दफ्तर से पहुंचे फरमान को भी गरियाबंद जिला प्रशासन ने कचरे के टोकरी में डाल दिया। गरियाबंद आदिवासी विभाग के विगत तीन साल के कार्यकाल के लगातार शिकायत होने के बावजूद जांच,कार्यवाही लंबित है जिसके लिए अब शिकायतकर्ता न्यायालय की शरण जाने का मन बना रहे है ताकि पूरे मामले में दोषी अधिकारी के अलावा उच्च पदस्थ अधिकारी भी कार्यवाही में पर्दा डालने के कारण कटघरे में वो भी खड़ा होकर जवाब दे।