मुंगेली जिले में शहरी क्षेत्र पर नजरी नक्शा की बाध्यता लागू कर राज्य सरकार के केबिनेट आदेश की उड़ाई जा रही धज्जियां

सार: “एक जागीरदार यदि अपनी मिल्कियत की संपत्ति विक्रय करता है तब सरकार के नए कानून के प्रावधानों अनुसार सिर्फ बी–1 के आधार पर रजिस्ट्री किया जाना चाहिए और स्वमेव नामांतरण के आधार पर नए ऋण पुस्तिका भी पटवारी द्वारा बिना मांगे मिलने का प्रावधान बनाया गया है मगर छत्तीसगढ़ राज्य का यह पहला मुंगेली जिला है जहां कोई भी रजिस्ट्री के लिए पटवारी द्वारा नजरी नक्शा जारी किए बिना रजिस्ट्री नहीं हो रहा है”।

विस्तार: मार्च के महीने में हर वर्ष रजिस्ट्रियां रात दिन देखी जाती रही क्योंकि वर्षों से प्रतिवर्ष एक निश्चित अनुपात में रजिस्ट्री शुल्क भी बढ़ा दिया जाता रहा और लोगों को मार्च में अपनी रजिस्ट्रियां भी करानी होती थी जिससे जिले के कुल राजस्व का एक बड़ी आमदनी राज्य सरकार को इसी मार्च माह में होती रही है। मगर इस वर्ष लोगों की रजिस्ट्रियों में तहसील स्तर पर नजरी नक्शा की अनिवार्यता के हवाले से एक पटवारी के कंधे पर बंदूक रख पूरे सिस्टम द्वारा अवैध वसूली का जरिया बना कर रखा गया है जबकि रजिस्ट्रियां में नजरी नक्शा की बाध्यता किसी जिले में नहीं है।

विष्णुदेव सरकार के केबिनेट बैठक के निर्णय में रजिस्ट्रियों को सरल करने बहुत सारे नए आदेश पारित किए गए जिसमें लगभग संपत्तियों के क्रय विक्रय में तहसीलदार अथवा तहसीलदार से संबंधित किसी भी का कोई हस्तक्षेप समाप्त कर ऑनलाइन बी–1 के आधार पर रजिस्ट्री होना सुनिश्चित किया गया साथ विक्रय निष्पादित होने के तुरंत तहसील में पेशी,पैसे का बिना परेशानी भोगे नामांतरण का भी प्रावधान कर दिया गया मगर मुंगेली जिले के मुंगेली शहरी क्षेत्र और आसपास के कुछ हलकों में जहां बिना तहसीलदार के इशारे के पटवारी नजरी नक्शा नहीं दे रहे हैं और नजरी नक्शा के बिना पंजीयक दफ्तर भी उन रजिस्ट्रियों को रोक पटवारी के भेंट पूजा और नज़री नक्शा लाने सब रजिस्ट्रार द्वारा बाध्य किया जा रहा है। इस संबंध में राजस्व के लिए सबसे जिम्मेदार सब रजिस्ट्रार से नजरी नक्शा की अनिवार्यता नहीं होने कहने पर उनके द्वारा मुंगेली की वर्षों पुरानी अपनी परंपरा होने की दुहाई दी जा रही है इस प्रकार पूरे पड़ताल में समझ यह आ रहा है कि अब राज्य सरकार के नए निर्णय के बाद 5 डीसमिल किसी भी स्वभाव की भूमि रजिस्ट्री होने के प्रावधान के बाद एसडीएम ऑफिस से प्रतिबंधित रखे खसरों को इस सरकार के नए निर्णय आने के बाद भी अवैध प्लाटिंग अथवा 5 डीसमिल की रजिस्ट्रियां होने एसडीएम द्वारा कोई पत्र व्यवहार अब तक नहीं किया गया जिसके कारण शहरी क्षेत्र के अधिकांश खसरों की 5 डीसमिल या उससे अधिक की रजिस्ट्रियां बेवजह रोक रखी गई है जिससे करोड़ों रुपए राजस्व की हानि हो चुकी है बावजूद अब तक जिम्मेदार सब रजिस्ट्रार अथवा एसडीएम,तहसील के विभागीय रोड़े को नहीं हटाया गया है।

वर्तमान में मुंगेली शहरी क्षेत्र की हो रही रजिस्ट्री में 5 डीसमिल या उससे अधिक की रजिस्ट्रियों के लिए पटवारी के द्वारा सत्ता शासित लोगों की सिफारिश,तहसीलदार के कहने अथवा पटवारी को स्वयं एक तयशुदा फीस देने पर ही नजरी नक्शा उपलब्ध होने की मुंगेली में इन दिनों गली गली चर्चा जोरो पर है।

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