राजिम कुंभ कल्प 2026 के टेंडर पर सवालों की आंच, 3 दिन में 6 करोड़ का खेल!

रायपुर/गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक आयोजन राजिम कुंभ कल्प 2026 को लेकर जिला प्रशासन गरियाबंद द्वारा जारी की गई टेंडर प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में आ गई है। करोड़ों रुपये के इस भव्य आयोजन के लिए बेहद कम समय में टेंडर आमंत्रित किए जाने से पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

कलेक्टर कार्यालय गरियाबंद द्वारा जारी टेंडर के अनुसार, राजिम कुंभ कल्प 2026 का आयोजन 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक प्रस्तावित है। इस आयोजन के लिए दो अलग-अलग पैकेजों में लगभग 6 करोड़ 6 लाख रुपये के कार्यों हेतु टेंडर आमंत्रित किए गए हैं।


3 दिन में कुंभ की तैयारी!
टेंडर प्रक्रिया की समय-सीमा देखकर नियम-कायदों की अनदेखी साफ नजर आती है। 7 जनवरी को टेंडर का विज्ञापन जारी किया गया और 10 जनवरी को बीड क्लोज कर दी गई। यानी महज 3 दिनों में करोड़ों रुपये के काम का टेंडर। हालात ऐसे हैं कि इसकी रफ्तार के सामने बुलेट ट्रेन भी पानी मांगती नजर आए।

राजनीतिक गलियारों में तंज कसते हुए कहा जा रहा है कि शायद गरियाबंद प्रशासन ने कोई ऐसी तकनीक खोज ली है, जिसमें ठेकेदार नींद में ही करोड़ों का प्रेजेंटेशन तैयार कर लेता है और अगली सुबह टेंडर भी जीत जाता है

कांग्रेस का हमला

इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने कहा कि जब खुद मुख्यमंत्री जिले में मौजूद हों, तब अधिकारियों की इतनी हिम्मत कि वे खुलेआम “खेला” कर रहे हैं।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा,
3 दिन की समय-सीमा साफ बताती है कि मैच फिक्सिंग पहले ही हो चुकी है। ठेकेदार माला पहनकर तैयार बैठा है, टेंडर तो बस उसे सरकारी तिलक लगाने की रस्म है।

पहली बार यह जिम्मेदारी पर्यटन विभाग से हटाकर सीधे कलेक्ट्रेट को सौंपी गई थी। उम्मीद थी कि व्यवस्था बेहतर होगी, लेकिन अब इसे ‘जंबूरी कैंप पार्ट-2’ बताया जा रहा है।

मामले पर जब कलेक्टर भगवान सिंह उईके से फोन पर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने हर बार की तरह फोन उठाना जरूरी नहीं समझा। कलेक्टर की यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। बिना किसी के जानकारी के अपने लेवल से जारी किए निविदा में 21 दिन के नियम और पारदर्शिता की याद ही नहीं रही। जबकि विधिवत यह निविदा की प्रक्रिया ऑनलाइन लोक निर्माण विभाग के माध्यम से की जानी चाहिए। इस काम और भव्यता को देखते हुए सरकार तक सतर्क रहती है वही कलेक्टर गरियाबंद शौचालय निर्माण की प्रक्रिया जैसा इतने भारी भरकम काम के लिए आनन फानन में टेंडर कर दिया गया।

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