कालजयी बाल कहानियां हैं आधुनिक संदर्भों में भी प्रासंगिक

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की महत्वपूर्ण परियोजना आधुनिक कालजयी बाल कहानियां, जिसका उद्देश्य बच्चों में व्यक्तित्व निर्माण एवं नैतिक मूल्यों के साथ अपनी साहित्यिक सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरुक करना है, का नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 को थीम पवेलियन मे लोकार्पण किया गया ।

इस सीरीज का नेतृत्व माननीय अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे के मार्गदर्शन में, माननीय निदेशक श्री युवराज मलिक तथा मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक श्री कुमार विक्रम द्वारा किया गया।

इस श्रृंखला के अंतर्गत प्रारंभिक चरण में सात पुस्तकें प्रकाशित की गई हैं, जिनमें हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित रचनाकारों की कालजयी कहानियों को रंग-बिरंगे चित्रों के साथ पुस्तक रूप मे प्रस्तुत किया गया है| इन पुस्तकों के लिए कहानियों का चयन विभिन्न आयुवर्ग के बच्चों के मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर किया गया है|

पहले सेट में प्रेमचंद की कहानी मिट्ठू, आचार्य शिवपूजन सहाय की कुंजी, भीष्म साहनी की कहानी चमगादड़ का रस और दो गौरैया, सुदर्शन की साईकिल की सवारी, अमरकांत की बहादुर और विष्णु प्रभाकर की कहानी सबसे सुंदर लड़की शामिल हैं। इन पुस्तकों के प्रकाशन में परियोजना अधिकारी डॉ. ललित किशोर मंडोरा तथा सहयोगी संपादक योगिता यादव का उल्लेखनीय योगदान रहा है।

द्विभाषी बाल पुस्तकें, ताकि हर बच्चा अपनी भाषा मे पढ़े

एनबीटी इंडिया के बाल पुस्तकालय को समृद्ध करने वाली 6 और द्विभाषी पुस्तकों का भी थीम पवेललियन में लोकार्पण किया गया। दोनों भाषाओं में तैयार इन पुस्तकों का उद्देश्य हर बच्चे को उसकी अपनी भाषा में पठन सामग्री उपलब्ध करवाना है।

इसमें भारत के मधुर रंग (Sweet Colours of India), पानी ही पानी (A Story about Water), पूँछ (Tail), मददगार हाथ (A Helping Hand), क्या करें रावण का! (Ravan Remedy), अचंभा अष्टभुजा (Amazing Octi), आज़ाद करो (Set Me Free)। इन सभी पुस्तकों को प्री स्कूल से लेकर 8 वर्ष तक के बच्चों के लिए तैयार किया गया है।

विद्या और छोटा भीम-बिग ग्रीन मिशन का शुभारंभ
नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत और बिसलेरी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित एक विशेष पहल, जिसे बच्चों के लिए एक सार्थक कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) कार्यक्रम के रूप में परिकल्पित किया गया है, का भी आज शुभारंभ किया गया। यह पुस्तक “टुवर्ड्स रिस्पॉन्सिबल यूज़ ऑफ प्लास्टिक्स” नामक मूल प्रकाशन का रूपांतरण है, जिसकी परिकल्पना बिसलेरी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड ने सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन के सहयोग से की थी। इस सशक्त आधार पर आगे बढ़ते हुए, नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत और बिसलेरी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड ने सामग्री को कॉमिक प्रारूप में पुनर्कल्पित किया है, ताकि सततता से जुड़े विचार नन्हें पाठकों के लिए अधिक सुलभ और रोचक बन सकें।
पर्यावरण की चिंताओं पर बात करने के उद्देश्य से एक समूह चर्चा का भी आयोजन किया गया, जिसका शीर्षक पर्यावरण के प्रति जागरूक नागरिकों का निर्माण: परिवारों और विद्यालयों की भूमिका था। इस चर्चा में श्री के. गणेश, श्री आशीष जैन, डॉ. श्रुति शर्मा, सुश्री छवि मेहता, सुश्री हर्ष्नु वाधवा ने भागीदारी की। इस अवसर पर श्री प्रभजोत सोढ़ी, वरिष्ठ कार्यक्रम निदेशक, सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन सलाहकार, मटेरियल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया एवं सलाहकार, अर्थ डे नेटवर्क इंडिया भी मौजूद रहे।
बच्चों के लिए विशेष तौर पर तैयार इन पुस्तकों के लोकार्पण के अवसर पर एनबीटी, इंडिया के निदेशक श्री युवराज मलिक ने कहा कि, “स्टोरीटेलिंग हमारी परंपरा का हिस्सा रहा है। आज जो नई पीढ़ी है और यंग मदर्स हैं उनके पास कहने के लिए कहानियां नहीं हैं। हम सोशल मीडिया फीड और इंस्टा की रील से जनरेशन नहीं बना सकते। इसके लिए उन्हें कंटेंट देना होगा, जो संस्कारों, संस्कृति और कहानियों में हमें मिलता है। सांस्कृतिक विरासत को फिर से जिंदा करने की कोशिश हैं ये पुस्तकें और पुस्तक मेले। कोई भी बच्चा किताबों से अछूता न रह जाए। हर हाथ में किताब हो और हर बच्चा अपनी पसंद की किताबें अपनी मातृभाषा में पढ़ सके। राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को आगे ले जाने का काम हम कॉन्टेंट के माध्यम से करें।”

इस अवसर पर मौजूद राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के अध्यक्ष श्री मिलिंद सुधाकर मराठे जी ने भी नई पीढ़ी के व्यक्तित्व निर्माण में साहित्य और कहानियों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इसे परिवार और समाज की जिम्मेदारी से भी जोड़ा। वहीं मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक श्री कुमार विक्रम ने किस्सागोई के महत्व और नए समय में इनकी प्रासंगिकता पर बात की |

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