मुंगेली। छत्तीसगढ़ राज्य जहां पिछले एक वर्षों से राज्य सरकार के बहुत से कैबिनेट में लिए निर्णय को जिला प्रशासन प्रभावी नहीं रखा है जिसमें सबसे बड़ा मामला 5 डीसमिल रजिस्ट्रियां पूर्णतः प्रतिबंधित है जबकि राज्य सरकार के केबिनेट में किए निर्णय में स्पष्ट आदेश दिया गया है कि ” 5 डीसमिल भूमि जो कि किसी भी स्वभाव की हो विक्रय और नामांतरण किए जा सकेंगे” बावजूद मुंगेली जिले में राज्य सरकार के इस आदेश को शून्य रखे जाने से करोड़ों रुपए राजस्व की हानि भी हुई।
दूसरी तरफ अवैध प्लाटिंग के लिए एसडीएम द्वारा समय समय पर कार्यवाही करते हुए इन अवैध कालोनाईजरो के प्लाटिंग में रजिस्ट्रियों पर रोक लगाई गई इस रोक लगाने के बावजूद इसी एसडीएम के पावर से उन्हीं अवैध कालोनाईजरो की अवैध प्लाटिंग के डायवर्सन मोटी लेनदेन करते हुए निरंतर होने की पुख्ता जानकारी मिल रही है। हालांकि जागरूक जनप्रतिनिधि और विधायक अन्य विधानसभाओं में म्युनिसिपल के गलत एनओसी दिए जाने के मुद्दे को उठाते हुए कड़ी कार्यवाही करवाने में सफल रहे मगर मुंगेली जिले में एसडीएम द्वारा अवैध कालोनी की औपचारिक कार्यवाही करने के बावजूद उसी कालोनी में बिक्रित हुए प्लाट मोटी रकम की लेनदेन से डायवर्सन किए जा रहे है.
क्या इस एसडीएम कार्यालय के दोहरे मापदंड स्वमेव प्रमाणित नहीं हो रहे है? एसडीएम के अलावा जिले के अन्य जिम्मेदार अफसर इतनी बड़ी भ्रष्टाचार को रोकने या एसडीएम पर कोई बड़ी कार्यवाही करने की हिमाकत क्यों नहीं कर रहे है?
बता दें मुंगेली जिले अंतर्गत अवैध कालोनाईजरो को लगभग 8-10 वर्षों के इतिहास की पड़ताल की जाए तब समझ यही आएगा कि यही जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी अवैध प्लाटिंग के लिए पहले लेनदेन कर प्रश्रय देते रहे जिसके कारण मुंगेली जिले में टीएनसी और रेरा प्रभावी नहीं हो सका। उसके अलावा वही एसडीएम अवैध प्लाटिंग पर कार्यवाही के ढकोसले के बाद उन्हीं रकबे के टुकड़े टुकड़े में हुए रजिस्ट्रियों को शून्य ना कर डायवर्सन कर दिया गया। एसडीएम ऑफिस के इस स्कैम में भी जिला प्रशासन जरा सा कार्यवाही की रुचि दिखाए तब शासकीय नियमों में पहले कार्यवाही बाद में अवैध कालोनाईजरों को लेनदेन कर संरक्षण देने का गंभीर अपराधिक मामले के साथ ही एक बड़ा खुलासा हो सकेगा।
शीघ्र ही एक बड़े खुलासे के साथ 13 वर्षों में एसडीएम दफ्तर से कितनी अवैध प्लाटिंग के नाम बनावटी कार्यवाही हुई और उन्हीं कार्यवाही के बाद शत प्रतिशत रजिस्ट्री शून्य करने के बजाय डायवर्सन कर देने के मामले को आंकड़ों और नाम सहित अगले अंक में खुलासा करेंगे।