कौन है गरियाबंद आदिवासी विभाग का सहायक आयुक्त?

  • विष्णु सरकार की कल्याणकारी योजना अनुरूप काम ना होकर बेलगाम है अधिकारी

गरियाबंद। आदिवासी विभाग के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार बेहतर काम कर रहे पढ़ने वाले बच्चों को हॉस्टल, छात्रवृत्ति, कोचिंग जैसी कई योजना आदिवासियों के हित के लिए योजना बना कर राहत दे रही है। बस्तर से लेकर सरगुजा तक आदिवासी हित का ध्यान रख रही है।

वहीं गत दो माह से आदिवासी बाहुल्य जिले गरियाबंद में आदिवासी विभाग के संचालन में प्रभारी सहायक आयुक्त की भूमिका विभागीय नगण्य दिख रही है। हालांकि दो बार स्थानान्तरण के बावजूद अपर कलेक्टर एवं प्रभारी सहायक आयुक्त नवीन कुमार भगत अपनी हठधर्मिता से पद पर बने हुए है मगर सिर्फ दिखाने के लिए अलग रूम में बतौर अपर कलेक्टर के रूप में पेश हो रहे है बचत शेष संपूर्ण आदिवासी विभाग के कार्य प्रभारी सहायक आयुक्त की हैसियत से नवीन कुमार भगत ही अभी भी अपने अधो हस्ताक्षर से ही संपादित कर रहे हैं।

घोर आश्चर्य जनक और विचारणीय गम्भीर तथ्य यह भी है कि वर्तमान कलेक्टर भगवान सिंह उइके के पहले पदस्थ रहे दीपक अग्रवाल भी अपर कलेक्टर एवं प्रभारी सहायक आयुक्त नवीन कुमार भगत को सहायक आयुक्त से हटाकर अन्य के प्रभार का आदेश जारी किए थे बावजूद वो पद पर उस कलेक्टर के रहने और कलेक्टर के स्थानांतरण बाद अब वर्तमान में पदस्थ कलेक्टर भगवान सिंह उइके द्वारा भी गम्भीर शिकायतों के बाद आदेश जारी कर चुप्पी साधे हुए है।

ऐसी भी बात बिल्कुल नहीं कि जिस अधीक्षक के लिए प्रभारी सहायक आयुक्त का प्रभार के लिए आदेश जारी किया गया है वो ना हो बल्कि अधीक्षक के मौजूदगी के बावजूद उन्हें प्रभार देने में महीनों बीत जाने के बावजूद हीलहवाला किया जा रहा है।

मालूम हो जिस हाल में आदिवासी विभाग संचालित हो रहा है उसमें विष्णु सरकार की तमाम बेहतर योजना के प्रचार प्रसार और विकास कार्यों का सम्पादन नहीं हो पा रहा है जआदिवासी बाहुल्य जिले गरियाबंद में नियमित और आरोप हीन सहायक आयुक्त के ना होने से विष्णु सरकार की अच्छी योजना को बताने में कोई दिलचस्पी नहीं ले पा रहा है साथ ही विभाग के सम्पूर्ण प्रैक्टिकल विकास कार्य को कागजों में खाना पूर्ति करने के भी आरोप है।

ऐसे में अब अगर कोई सहायक आदिवासी आयुक्त से पूछ ले सरकार आदिवासियों के लिए कौन कौन से अच्छे कार्य कर रही है तो कोई ढंग से जवाब देने के लिए सक्षम अधिकारी नहीं है। स्वयं आदिवासी विभाग के सचिव की भी गरियाबंद जिला में पकड़ कमजोर दिख रही है तभी तो ये अधिकारी एक तरह सरकार विरोधी या साइलेंट होकर काम कर रहे है, ऐसे में जो प्रभारी अधिकारी को विभाग से तुरंत हटाना चाहिए वरना ये सरकार की छवि खराब करने का काम करते रहेंगे।

जबकि सीएम विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और आमजनमानस से बेहतर तालमेल के साथ सरकार की योजना पर चर्चा करने का निर्देश दिया है लेकिन सीएम के इस निर्देश का पालन करने में जिला प्रशासन की कोई दिलचस्पी नहीं दिख रही है।

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