हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास,लोक अभियोजक मनीष चौबे ने की पैरवी

आरोपी की संस्वीकृति के आधार पर मिली सजा
मुंगेली(बंशी भाटवानी)। जिला एवं सत्र न्यायाधीश विद्वान अरविन्द कुमार सिन्हा द्वारा 23 अक्टूबर 2021 को दो वर्ष पूर्व दर्ज हुए अपने पत्नी हत्या के आरोपी को भा.द.स. की धारा 302, के अपराध में आजीवन कारावास एवं 02 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया एवं अर्थदण्ड के राशि अदा नही किये जाने पर 01 वर्ष सश्रम कारावास की सजा दी गई है।
इस प्रकरण में शासन की ओर से जिला लोक अभियोजक मनीष चौबे द्वारा पैरवी की गई। घटना 15 अगस्त 2019 को शाम 7 बजे की है। अचानकमार्ग के सरपंच द्वारा 15 अगस्त 2019 को चौंकी खुड़िया के निरीक्षक सीएम मालाकार को मोबाइल के माध्यम से यह सूचना दिया गया कि आरोपी द्वारा अपनी पत्नी की हत्या डण्डे और कूदरी से मारकर कर दी गई है। घटना स्थल पर पुलिस पहुंचने के पूर्व गांव के निवासी एवं सरपंच घटना स्थल पर उपस्थित थें पुलिस वाले के पहुंचने से पूर्व गांव वालों एवं सरपंच के पूछने पर आरोपी द्वारा बताया गया था कि आरोपी ने अपनी पत्नी की हत्या रोज शराब पीने तथा खाना नही बनाने और उसकी बात न मानने के कारण गुस्से में कर दी गई है। घटना की प्रथम सूचना पत्र आरोपी के भाई फुलसिंह द्वारा दर्ज करायी गई। जिसमे यह बताया गया कि अभियुक्त के घर के पास रहने वाले अमर अमर सिंह ने आरोपी के भाई फुलसिंह को बताया कि अभियुक्त की पत्नी की मृत्यु हो गई है। तब वहां जाकर देखा तो अभियुक्त की पत्नी मृतिका अधेली बाई चित्त अवस्था में थी जिसकी मृत्यु हो चुकी थी। और पास में आरोपी पति ननकू बैगा बैठा हुआ था जमीन पर खून के दाग पडे़े हुए थे। मृतिका के शरीर में विभिन्न स्थानों पर चोट के निशान थे। पुलिस द्वारा विवेचना कर माननीय न्यायालय के समक्ष अंतिम प्रतिवेदन पेश किया गया। इस प्रकरण में लोक अभियोजक मनीष चौबे द्वारा 11 साक्षियों का परीक्षण न्यायालय के समक्ष कराया गया। प्रकरण प्ररिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित था। अधिक्तर साक्षी आरोपी के रिश्तेदार एवं गांव के होने के कारण आरोपी के खिलाफ न्यायालय में गवाही देने से मुकर गए थे। लेकिन पक्षद्रोही घोषित होने के बाद शासकीय अधिवक्ता द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब से अभियोजन कहानी का समर्थन किया गया। तथा कुछ महत्वपूर्ण साक्षियों द्वारा आरोपी द्वारा अपनी पत्नी अधेली बाई की हत्या की बात स्वीकार किए जाने की बात न्यायालय में स्वीकार की गई। इसी तरह विवेचना के दौरान आरोपी के गमछे में मृतिका का खून लगा हुआ था। जिसे रासायनिक परीक्षण हेतु भेजा गया था। जिस पर रासायनिक परीक्षण की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख था कि आरोपी के गमछे में मृतिका के ग्रुप का मानव रक्त पाया गया है। मृतिका और आरोपी एक ही घर में निवासरत थे तथा घटना स्थल आरोपी का निवास स्थान था। जिसके कारण से मृतिका का हत्या किसके द्वारा और कैसे की गई यह बताने का दायित्व आरोपी पर था, जिसे माननीय न्यायालय के समक्ष आरोपी द्वारा यह नही साबित किया जा सका कि मृतिका की हत्या उसने नही की है।
इस तरह मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित होने के कारण आरोपी द्वारा गांव वालों एवं सरपंच के सामने की गई। हत्या कि न्यायिकेत्तर संस्वीकृति, रासायनिक परीक्षण की रिपोर्ट, पुलिस के पूछताछ में आरोपी द्वारा किए गए अपराध की स्वीकृति के आधार पर किए गए जप्ती के गवाहों द्वारा न्यायालय में आरोपी के खिलाफ कथन किया गया। तथा उक्त आधार पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विद्वान अरविन्द कुमार सिन्हा द्वारा पत्नी हत्या के आरोपी को भा.द.स. की धारा 302, के अपराध में आजीवन कारावास एवं 02 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया एवं अर्थदण्ड के राशि अदा नही किये जाने पर 01 वर्ष सश्रम कारावास की सजा दी गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *