पटना/रायपुर। बिहार की राजधानी के गांधी मैदान और पटना जंक्शन पर सिलसिलेवार बम ब्लास्ट मामले में सोमवार को एनआईए कोर्ट ने जिन चार को फांसी और दो को उम्रकैद व दो दोषियों को 10 तो एक को सात वर्ष की सजा सुनाई उस ब्लास्ट की साजिश छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रची गई थी।
बता दें कि 27 अक्टूबर 2013 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हुंकार रैली से पहले गांधी मैदान और जंक्शन में हुई वारदात में छह लोगों की जान चली गई थी। साथ ही करीब 85 लोग घायल हो गए थे। सीरियल बम ब्लास्ट (Gandhi Maidan Serial Bomb Blast) में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं एनडीए के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) आतंकियों के निशाने पर थे। पूरी योजना छत्तीसगढ़ के रायपुर में बनी थी।
रांची स्थित धुर्वा डैम के पास एक गांव किया गया था मानव बम का ट्रायल
आपको बता दें कि आतंकियों ने ट्रायल के लिए रांची स्थित धुर्वा डैम के पास एक गांव को चुना था। आतंकियों ने चमड़े की जैकेट बना उसमें टाइम बम सेट किया। फिर डैम के पास एक खजूर के पेड़ पर उसे लटका दिया। दो बार रिमोट का बटन दबाकर ट्रायल किया था, लेकिन बम ताकतवर नहीं था। साथ ही रैली के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम में टारगेट चूक न जाए, इस वजह से आतंकियों ने अंतिम समय में भाषण के दौरान सीरियल ब्लास्ट कर दहशत फैलाने की योजना बनाई थी।
मिर्जापुर में खरीदा था बम बनाने का सामान
आतंकियों का कनेक्शन मिर्जापुर से जुड़ा था। उमर और हैदर सहित एक अन्य आतंकी छत्तीसगढ़ के रायपुर में मिले थे। वहीं, तीनों ने अन्य साथियों के साथ मिलकर पहले मानव बम से वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई थी। इसके बाद मिर्जापुर गए, जहां अहमद हुसैन से मुलाकात की। अहमद भी दोषी करार दिया गया है। बम बनाने का सामान मिर्जापुर से खरीदा गया था। एनआईए ने मिर्जापुर में छापेमारी कर साक्ष्य जुटाए और वहां से दो लोगों को पकड़ा। दोनों के खिलाफ चार्जशीट पेश की। एक को साक्ष्य के अभाव में आज बरी कर दिया गया।