अपनी ही सरकार के खिलाफ दिख रहे मुंगेली के कांग्रेसी पार्षद…

पूर्व में भी ज्ञापन देने पहुंचे पार्षदों को कलेक्टर ने समझाइश के बाद लौटाया था

बार बार नगर पालिका अध्यक्ष संतुलाल सोनकर की बर्खास्तगी के लिए जिला प्रशासन के समक्ष सरकार को ही घेरने की दिख रही तैयारी

मुंगेली। नगर पालिका में अध्यक्ष पद के लिए मचे सियासी घमासान के बीच अब मानो ऐसा लगने लगा कि कांग्रेसी पार्षद स्वयं अपनी ही कांग्रेस शासित सरकार के खिलाफ हो रहे लामबंद। जिसका असर राजनैतिक रूप से ठीक नहीं दिख रहा है। पूरे मामले में अब तक विपक्षी भाजपा दल जिस दल की ही मुंगेली नगर पालिका में नगर सरकार है पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।जिसका प्रमुख कारण पूरा मामला न्यायालय के हस्तक्षेप में होना समझा जा रहा है। मगर कांग्रेसी नित नए नए हथकंडे अपना अध्यक्ष बर्खास्तगी कराने की नाकाम कोशिश में जुटे दिख रही है। बहरहाल ऐसा माना जा रहा है कि जब तक अब न्यायालय से कोई निर्णायक फैसला न हो जाय तब तक सरकार स्वयं किसी कटघरे में खड़े नही होने के मूड में है और वो सही भी है। मगर कुछ कुर्सी लोभी कोशिश को कामयाब करने लगे लोग नित नए नए पैतरे अपना कोशिश में लगे हुए हैं।

बता दे मुंगेली नगर पालिका चुनाव में भाजपा शासित नगर सरकार के काबिज होने के बाद से उठापटक चलते रहा है कभी सीएमओ को लेकर तो कभी नगर विकास में हो रहे अवरोध के बहाने कांग्रेसी, भाजपाई नूरा कुश्ती करते रहे हैं इसी बीच नगर पालिका में कुछ माह पूर्व नाली घोटाले का मामला उजागर होने के बाद अब राजनैतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले लोग अब अध्यक्ष संतुलाल सोनकर पर मामला,मुकदमा और अब जेल होने के बाद लगातार जिला प्रशासन व अन्य दाये बाये से अध्यक्ष को बर्खास्त करने की रूपरेखा बना रहे हैं मगर इनकी सरकार और ये कांग्रेसी पार्षद राजनैतिक महत्वाकांक्षा को आगे मान यह समझना भी भूल गए है कि बर्खास्तगी के हल्ले से इनकी ही सरकार के खिलाफ विरोध करना परिलक्षित हो रहा है जो कि आमजनमानस में भयंकर चर्चा का भी विषय बना हुआ है।

क्या कहते है जानकार

नाली घोटाले में भले ही अध्यक्ष संतुलाल सोनकर को आरोपी बना दिया गया है मगर अध्यक्ष अपनी हर दलील में अपने को व्यक्तिगत रूप से पाक साफ बताने लगे हुए हैं। उनके द्वारा बिना नाली निर्माण राशि आहरण के मामले में अपनी कार्यवाही में विधिसम्मत रूप से कार्यवाही करने की बात को ही जोर दिया गया है जो कि उनके बचाव के लिए अहम और निर्णायक भी हो सकता है कि वो दोषी होंगे या नही,मगर सिर्फ शिकायत व पुलिसिया मामला मुकदमा से किसी लोकतांत्रिक पदासीन जनप्रतिनिधि को दोषी बताते हुए पद बर्खास्तगी करना अथवा दबाव बनाना विधिसम्मत नही कहा जा सकता है और यदि सरकार कहीं ऐसा कर भी दी तब फिर से अध्यक्ष पद के लिए अध्यक्ष संतुलाल सोनकर को एक चांस न्यायालय से मिल सकता है।

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