नई दिल्ली। ओमिक्रॉन को लेकर दुनिया भर रिसर्च जारी है इस बीच सामने आए नए वैरिएंट के शुरुआती साक्ष्य इसके “अधिक संक्रामक” होने की ओर इशारा करते हैं। डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक (साउथ ईस्ट एशिया) डॉक्टर पूनम खेत्रपाल ने आज एक न्यूज चैनल से यह बात कही। उन्होंने कहा, “बीमारी की गंभीरता को अलग कर दिया जाए तो भी सिर्फ मामलों में होने वाली वृद्धि स्वास्थ्यसेवा प्रणाली के लिए भारी मांग खड़ा कर सकती है। साथ ही मृत्यु दर में वृद्धि भी हो सकती है।
“क्या मौजूदा टीके ओमिक्रॉन पर काम करते हैं?” बार-बार पूछे जाने वाले इस सवाल पर खेत्रपाल ने कहा, “कई स्टडी चल रही हैं। ओमिक्रॉन में कई म्यूटेशन को देखते हुए यह मान लेना उचित है कि मौजूदा टीके गंभीर रूप से बीमार होने और मौत के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं।
उन्होंने जोर दिया कि टीकाकरण में गंभीर जोखिम वाली आबादी समेत व्यस्कों, स्वास्थ्यसेवा कर्मचारियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। टीका लेने वालों में ओमिक्रॉन के मामले सामने आने के साथ, डॉक्टर खेत्रपाल ने कहा, यह जानना जरूरी है कि वैक्सीन संक्रमित होने की संभावना को कम करती है। वे संक्रमण को पूरी तरह से रोकते नहीं हैं, यह तथ्य सभी वेरिएंट के लिए सही है।
वैक्सीन की बूस्टर डोज की जरूरत को लेकर जारी बहस के बीच उन्होंने कहा, “मध्यम और गंभीर रूप से इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड लोगों को जोखिम अधिक होता है और उन्हें टीके की एक अतिरिक्त खुराक की पेशकश की जानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि आम आबादी के लिए डेटा की आवश्यकता है, बूस्टर खुराक के फायदे बनाम विभिन्न समूहों में प्राथमिक टीकाकरण के विस्तार के लाभों की वर्तमान में समीक्षा की जा रही है।
