मुंगेली नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव: नही दिख रही स्वच्छ परंपरा, सत्तारूढ़ दल के प्रभाव भी शून्य

• कांग्रेस में कहां है पर्यवेक्षक, क्यों नहीं दिख रही पार्टी गाइडलाइंस के पालन कराने की क्षमता
• वरिष्ठता और अनुभव दोनो ही आज के लब्बोलुआब में किया जा रहा नजरअंदाज

• सत्तारूढ़ दल से मनुराज सोनी,अरविंद वैष्णव एवं हेमेंद्र गोस्वामी है दावेदार

मुंगेली। कहने को कांग्रेस लंबे समय तक देश और विभिन्न प्रदेशों में राज की है इस पार्टी के अपने एक सिद्धांत है जिसके समक्ष धन प्रभाव अथवा दबाव दोनो काम नही आती रही है मगर हम बात करें मुंगेली नगर पालिका के वर्तमान में 5 जनवरी को होने वाले नगर पालिका अध्यक्ष के निर्वाचन अथवा ये कहा जाय चयन की तो यहां पार्टी अपने पर्यवेक्षण अथवा चयन में सक्रिय न दिख स्थानीय स्तर पर धन,बल और भी प्रभाव हावी दिख रहे है जिसके चलते सत्तारूढ़ दल के अध्यक्ष का पार्षदों के विवेक अथवा पार्टी की परंपरा अनुसार तय होना नही दिख रहा है। ऐसे में यहां फिलहाल धन,बल अथवा लोकल लेबल की पोलटिक्स हावी है। जिसमे अध्यक्ष पद में निष्पक्षता से चयन हो अथवा आमराय के बात मतदान से अध्यक्ष निर्वाचित होते नही दिख रहा है।

पार्टी के गाइडलाइंस और पर्यवेक्षक दोनो नही आ रहे नजर

वैसे तो हर चुनाव में कांग्रेस की परंपरा रही है कि चुनाव के कुछ समय पहले पर्यवेक्षक हर विषम परिस्थितियों में सामंजस्य बैठा एकरूपता ले आती है मगर मुंगेली नगर पालिका के अध्यक्ष चुनाव में फिलहाल पार्टी की ओर से कोई पर्यवेक्षक नियुक्त नही है साथ ही पार्षदों के बीच वरिष्ठता अथवा अनुभव को नजरअंदाज किया जा रहा है। ऐसे में यदि कोई आज के लब्बोलुआब में धन बल अथवा अन्य हथकंडे अपना अध्यक्ष निर्वाचित हो भी जाता है तब बचे तीन साल आपसी समन्वय से नगर हित के विकास की कल्पना करना महज खयाली पुलाव जैसा होगा।

पार्टी गाइडलाइंस, पर्यवेक्षण एवं स्थानीय पदाधिकारी के मत से हो अध्यक्ष का चयन

बता दे राज्य में कांग्रेस की सरकार के बावजूद मुंगेली नगर पालिका में बैठे भाजपा के नगर पालिका अध्यक्ष और उसके बाद एक घोटाले में फसने के बाद जो मुंगेली नगर पालिका में विकास के लिए दो साल गंवा चुके है अब ऐसे में फिर से कोई फिक्सिंग अथवा धनबल प्रभाव से अध्यक्ष का बन जाना उचित नही। यदि स्वच्छ निर्वाचन में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए चांस बन रहा हो तब अध्यक्ष प्रत्याशी पहले पर्यवेक्षक निर्णय ले स्थानीय पदाधिकारियों अथवा वरिष्ठ नेताओं के सलाह से उसके बाद ही पार्षदो के बीच से कोई नया काबिल अध्यक्ष बने।

भाजपा हर मामले में कम नही,अध्यक्ष बिठाने दिख रहे तैयार

वहीं दूसरी ओर भाजपा में भी अध्यक्ष पद के लिए वर्तमान उपाध्यक्ष मोहन मल्लाह के अलावा गायत्री आनंद देवांगन, अंजलि यादव दावेदार है जिनके पास भाजपा के स्थानीय विधायक पुन्नूलाल मोहले व पार्टी गाइडलाइंस से प्रत्याशी बनाये जाने की संभावना है महज एक वोट का फासला है यदि धनबल या कोई और फिक्सिंग की गुंजाइश न बने तब पुनः भाजपा का अध्यक्ष बन जाय तब भी कोई अतिश्योक्ति नही कही जा सकती।

कार्यवाहक अध्यक्ष का किया जा चुका है विरोध

बता दें राज्य सरकार द्वारा जब आनन फानन में पार्षद हेमेंद्र गोस्वामी को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया था तब भाजपा के नगर विधायक पुन्नूलाल मोहले सहित तमाम भाजपा के नेताओं ने इस परंपरा का विरोध किया जिस मामले को चुनाव आयोग ने त्वरित संज्ञान में लेते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी को अध्यक्ष निर्वाचन की परंपरा का पालन करने निर्देश दिए।

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