संपत्ति विवाद लगातार बढ़ता हुआ मुख्यमंत्री से मिल की गई सहयोग की मांग

राजनांदगांव: संपत्ति विवाद का मामला तूल पकड़ने के बाद प्रशासन ने राजमहल “कमल विलास” को सील कर दिया है। इस बीच स्व देवब्रत सिंह की पहली पत्नी अपने दोनों बच्चों के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात कर सहयोग की मांग की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी को मदद करने आस्वस्थ किया है।

खैरागढ़ रियासत के राजा और विधायक रहे देवव्रत सिंह की मौत के बाद संपत्ति विवाद ने राजपरिवार से उनका महल तक छीन लिया। विवाद इतना बढ़ा कि प्रशासन को दखल देना पड़ा। अफसरों ने साल के पहले दिन शनिवार को पैलेस ‘कमल विलास’ को सील कर दिया है। वहां रहने वाले राज परिवार के सभी सदस्यों और नौकरों को बाहर कर दिया गया है। राज परिवार में चल रहे विवाद को देखते हुए SDM खैरागढ़ ने शनिवार को राजमहज कमल विलास पैसेल को सील करने का आदेश जारी किया।

इसमें कहा गया है कि स्व. देवव्रत सिंह की पुत्री शताक्षी और अन्य 3 व विभा सिंह के बीच खैरागढ़ तहसील में मामला विचाराधीन है। राजा स्व. देवव्रत सिंह के कमल विलास पैलेस के अधिपत्य और बंटवारे को लेकर इन पक्षों में विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है। इसके चलते अंतिम निराकरण होने तक कमल विलास पैलेस को सीलबंद किया जाना ही उचित प्रतीत होता है। इस आदेश के बाद शाम को प्रशासन की टीम पैलेस को सील करने की कार्रवाई के लिए पहुंच गई। उन्होंने राजपरिवार के सभी सदस्यों वहां रहने वाले नौकरों को पैलेस खाली करने के लिए कह दिया। नौकरों को उनका सामान और राजपरिवार के सदस्यों को निजी व जरूरी उपयोगी सामान ले जाने की अनुमति दी गई। सदस्यों के बाहर आने के बाद पैलेस को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इसे राजघराने का मुख्य पैलेस माना जाता है।


संपत्ति को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद एक सप्ताह पहले सड़क पर आ गया, जब एक ऑडियो वायरल हुआ। इस ऑडियो में दिवंगत राजा स्व. देवव्रत सिंह और उनकी दूसरी पत्नी विभा सिंह के साथ पैतृक गहने, नगदी और जबरन कमल विलास पैलेस में कब्जा करने जैसी बाते थीं। इसके बाद 5 दिन पहले उनके बेटे आर्यव्रत सिंह और बेटी शताक्षी सिंह सामने आए और विभा सिंह पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाकर मदद की गुहार लगाई। इसके अगले ही दिन राजा के बच्चों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर जनता भड़क गई।

बड़ी संख्या में समर्थकों कमल विलास पैलेस का घेराव कर दिया। मौके पर मौजूद पुलिस ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन महल के अंदर तक जाने से रोक नहीं पाई। पुलिस अधिकारी विरोध प्रदर्शन करने आए लोगों को समझाते रहे, लेकिन वे नहीं माने। विभासिंह के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते रहे और उन पर जबरन पैलेस में कब्जा करने का आरोप लगाया।

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