- कलेक्टर से जिला स्तरीय जांच टीम गठित करने की मांग, जांच पूरी होने तक भुगतान रोकने की अपील।
- मामले में जिले के डिप्टी कलेक्टर रोहित कुमार सिंह भी इसी मामले में रिलीव होने पर भी अन्यत्र ज्वाइनिंग नहीं लेने की हो रही चर्चा।
कोरबा। एसईसीएल दीपका क्षेत्र अंतर्गत ग्राम हरदीबाजार में अधिग्रहित भूमि पर निर्मित मकानों के सर्वेक्षण एवं मुआवजा वितरण को लेकर शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता ने जिला कलेक्टर, कोरबा को आवेदन सौंपकर वर्ष 2004 एवं 2010 में अधिग्रहित भूमि पर बने मकानों के सर्वेक्षण का भौतिक सत्यापन कराने तथा मुआवजा वितरण से पहले मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
आवेदन के अनुसार, ग्राम हरदीबाजार, तहसील हरदीबाजार, जिला कोरबा में भूमि अधिग्रहण के बाद वर्ष 2025 में मकानों का सर्वेक्षण एवं नापी की गई है। वर्तमान में एसईसीएल दीपका क्षेत्र द्वारा भूमि एवं मकानों के मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया जारी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ मकानों का निर्माण श्यामू उर्फ खुशाल जायसवाल एवं रामू उर्फ हीरामणी जायसवाल, पिता स्वर्गीय परमात्मा जायसवाल, से संबंधित बताया गया है, जबकि सर्वेक्षण एवं मुआवजे की प्रक्रिया अन्य भूमि स्वामियों के नाम पर की गई है।
शिकायत में बजरंग यादव पिता छबिलाल, चन्द्रभान सिंह कंवर पिता कंगालू तथा प्रवीण कुमार एक्का पिता मरदल्ली एक्का के नाम पर मकानों की नापी किए जाने का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि इस प्रक्रिया के तहत करोड़ों रुपये की मुआवजा राशि गलत तरीके से स्वीकृत कर शीघ्र भुगतान किए जाने की तैयारी है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि श्यामू उर्फ खुशाल जायसवाल एवं हीरामणी जायसवाल से संबंधित पूर्व में ग्राम मलगांव में अधिग्रहित भूमि पर मकान निर्माण और मुआवजा प्राप्त करने का मामला भी रहा है। शिकायतकर्ता ने उक्त मामले में पूर्व में सीबीआई जांच होने की बात कही है तथा उसकी वर्तमान स्थिति की जानकारी लेकर जांच किए जाने की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण में राजस्व विभाग के अधिकारियों और एसईसीएल के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की आवश्यकता जताई है। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से जिला स्तरीय जांच दल गठित कर भूमि अभिलेखों, मकानों के वास्तविक निर्माण, सर्वेक्षण रिपोर्ट, पात्रता एवं मुआवजा निर्धारण से जुड़े दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है।
आवेदन के माध्यम से कलेक्टर से आग्रह किया गया है कि जांच पूरी होने तक विवादित मुआवजा राशि के भुगतान पर रोक लगाई जाए तथा जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाए। अब इस मामले में जिला प्रशासन एवं एसईसीएल प्रबंधन की ओर से की जाने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।