- सोशल मीडिया और सूक्ष्म पत्रकारिता के नाम पर अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिशों को लेकर उठे सवाल
- जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
मुंगेली। जिले में इन दिनों सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और तथाकथित सूक्ष्म पत्रकारिता के नाम पर प्रशासनिक अधिकारियों एवं पुलिस पर दबाव बनाने की कथित कोशिशों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ लोग पत्रकारिता की पहचान अथवा मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग अपने व्यक्तिगत, व्यावसायिक या राजनीतिक हित साधने के लिए कर रहे हैं। विशेष अवसरों पर सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देने वाली टिप्पणियों और गतिविधियों ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
बताया जा रहा है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा समाचार कवरेज, इंटरव्यू अथवा डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहुंच का हवाला देकर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा अन्य विभागों के अधिकारियों तक तत्काल पहुंच बनाने का दबाव बनाने की कोशिश की जाती है। यदि ऐसे मामलों में किसी प्रकार का अनुचित दबाव, धमकी, भयादोहन अथवा आर्थिक लेन-देन सामने आता है तो उसकी स्वतंत्र जांच किए जाने की आवश्यकता है।
–मानसिक दबाव, कथित उगाही और ब्लैकमेलिंग के आरोपों की जांच की जरूरत
पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रियता लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन पत्रकारिता और व्यक्तिगत हितों के लिए मीडिया की पहचान के कथित दुरुपयोग के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना भी जरूरी है। आरोप हैं कि कुछ लोग मीडिया की आड़ में अधिकारियों, कारोबारियों अथवा अन्य व्यक्तियों पर अनैतिक दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
ऐसे मामलों में केवल आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बजाय उपलब्ध दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, शिकायतें, आर्थिक लेन-देन, प्रकाशित सामग्री और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। यदि जांच में उगाही, ब्लैकमेलिंग, धमकी या अन्य गैरकानूनी गतिविधि प्रमाणित होती है तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
–सेवानिवृत्त वक्रीय मानसिकता के लोगों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
कुछ सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारियों के पत्रकारिता अथवा डिजिटल गतिविधियों में सक्रिय होने को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। किसी व्यक्ति का सेवानिवृत्ति के बाद पत्रकारिता से जुड़ना अपने आप में अनुचित नहीं है, लेकिन यदि पूर्व सेवा काल में उसके विरुद्ध गंभीर शिकायतें, विभागीय जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई हो और वर्तमान गतिविधियों में भी नियमविरुद्ध आचरण के आरोप सामने आ रहे हों, तो संबंधित रिकॉर्ड की नियमानुसार समीक्षा की जा सकती है।
–कर, श्रम और नगर पालिका संबंधी मामलों की भी हो निष्पक्ष जांच
मीडिया में संलग्न होने की आड़ में कुछ लोगों के संबंध में कर भुगतान, व्यावसायिक गतिविधियों, श्रम कानूनों तथा नगर पालिका से जुड़े दायित्वों की अनदेखी के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। यदि ऐसे आरोप प्रशासन के संज्ञान में आते हैं तो संबंधित विभागों द्वारा नियमित प्रक्रिया के तहत अभिलेखों की जांच की जानी चाहिए।
नगर पालिका, श्रम विभाग, कर संबंधी विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि किसी व्यक्ति अथवा प्रतिष्ठान को प्राप्त सरकारी सुविधा या योजना का लाभ नियमों के अनुरूप ही मिल रहा है। किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर समान रूप से कार्रवाई की जानी चाहिए।
–प्रशासन को राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर कार्रवाई करनी होगी
लोकतंत्र में सरकार, प्रशासन और पुलिस की आलोचना करने का अधिकार नागरिकों एवं मीडिया दोनों को है। लेकिन आलोचना और दबाव, धमकी अथवा भयादोहन के बीच स्पष्ट सीमा है। प्रशासन को आलोचनात्मक पत्रकारिता से घबराने के बजाय गैरकानूनी गतिविधियों पर कानून के मुताबिक कार्रवाई करनी चाहिए। व्यक्तिगत जिला प्रशासन के किसी अधिकारी को किसी बैठक में मीडिया की आड़ में हर समय उपलब्धता का धौंस अथवा बाध्यता भी एक अपराध जन्य है।
यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध पूर्व में शिकायतें या प्रकरण दर्ज रहे हैं, तो उनके आधार पर वर्तमान में स्वतः दोषी मानने के बजाय प्रत्येक मामले की वर्तमान स्थिति और प्रमाणों की समीक्षा की जानी चाहिए। यही निष्पक्ष प्रशासन की पहचान होगी।
–जिला प्रशासन के लिए पांच महत्वपूर्ण सुझाव
~मीडिया की पहचान का सत्यापन
जिले में सक्रिय पत्रकारों और डिजिटल मीडिया संस्थानों के संबंध में उपलब्ध वैधानिक दस्तावेजों एवं संस्थागत विवरणों का नियमानुसार सत्यापन किया जाए।
~शिकायतों के लिए स्वतंत्र व्यवस्था
पत्रकारिता की आड़ में धमकी, भयादोहन या कथित उगाही की शिकायतों के लिए गोपनीय एवं पारदर्शी शिकायत प्रणाली विकसित की जाए।
~विभागीय रिकॉर्ड की समीक्षा
जिन व्यक्तियों के विरुद्ध पूर्व शासकीय सेवा अथवा वर्तमान गतिविधियों से संबंधित गंभीर शिकायतें हैं, उनके रिकॉर्ड की नियमानुसार समीक्षा की जाए।
~विभागीय समन्वय
पुलिस, नगर पालिका, श्रम विभाग और राजस्व/कर संबंधी विभागों के बीच आवश्यक समन्वय स्थापित कर नियमों के उल्लंघन की जांच की जाए।
~कानून सबके लिए समान
किसी राजनीतिक, सामाजिक अथवा मीडिया पहचान से प्रभावित हुए बिना, प्रमाण मिलने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ समान रूप से वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
–पत्रकारिता की गरिमा बचाना सामूहिक जिम्मेदारी
पत्रकारिता सत्ता से सवाल पूछने और समाज की समस्याओं को सामने लाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए कुछ व्यक्तियों के कथित आचरण के कारण पूरी पत्रकार बिरादरी पर सवाल उठना दुर्भाग्यपूर्ण होगा। जरूरत इस बात की है कि वास्तविक और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्रोत्साहित किया जाए तथा मीडिया की पहचान का कथित दुरुपयोग करने वालों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो।
जिला प्रशासन यदि ऐसे मामलों में शिकायतों का संज्ञान लेकर दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर पारदर्शी जांच और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करता है, तो इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था में विश्वास मजबूत होगा, बल्कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता और गरिमा बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।