रायपुर। केंद्र सरकार का वस्तु एवं सेवा कर चार साल बाद भी कारोबारियों के लिए आसान नहीं बन पाया है। इसकी वजह से कारोबारी परेशानी जारी है। छत्तीसगढ़ के पंचायत, स्वास्थ्य एवं वाणिज्यिक कर (GST) मंत्री टीएस सिंहदेव ने रविवार को कारोबारी संगठनों की बैठक बुलाई तो यह तकलीफ भी सामने आई। कई कारोबारियों ने कहा, इसकी वजह से अकाउंट समझने में पूरा दिन बीत जाता है। व्यवसाय को आगे बढ़ाने की तो सोच ही नहीं पाते।
रायपुर के नवीन विश्राम गृह सभागार में हुई बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र जग्गी, सराफा एसोसिएशन के शंकर बजाज,कैट के प्रतिनिधि,राइस मिलर्स,अनाज व्यवसाय संघ ने अपनी परेशानियों से वाणिज्यिक कर मंत्री टीएस सिंहदेव को अवगत कराया। इस दौरान मंत्री टीएस सिंहदेव के साथ प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी, GST आयुक्त समीर विश्नोई और कांग्रेस नेता और कर सलाहकार रमेश वर्ल्यानी भी बैठक में मौजूद रहे। जिस पर मंत्री सिंहदेव ने सभी व्यापारिक संगठनों से अगले दो-तीन दिनों में अपने लिखित सुझाव देने को कहा है। उन्होंने कहा, इन सुझावों पर चर्चा के बाद सरकार जरूरी कदम उठाएगी।
कम हो गई राज्य की आमदनी
टीएस सिंहदेव ने कहा, कोरोना आने के बाद अर्थव्यवस्था के ऊपर बड़ा प्रभाव पड़ा है। इस दौरान GST कलेक्शन और टैक्स कलेक्शन का भार सीधा-सीधा राज्यों पर पड़ा। इसमें छत्तीसगढ़ को बड़ा नुकसान हुआ है।
उन्होंने बताया, सामान्य तौर पर दिखता है कि जैसे पहले 5% वैट लगता था तो 5% GSTलग रहा है। लेकिन ऐसा है नहीं। यह 5% GST केंद्र और राज्य सरकार में आधा-आधा बंट जाता है। ऐसे में हर तरफ से राज्यों को ही अपनी व्यवस्था देखनी पड़ेगी। पिछले तीन साल में राजस्व का नुकसान हुआ। क्षतिपूर्ति नहीं हो पाई। जब क्षतिपूर्ति का प्रावधान भी हट जाएगा तो दिक्कत बढ़ेगी।