बिलासपुर:शहर के कुछ निजी अस्पतालों का मनमानी थमने का नाम ही नही ले रहा है मरीज अब इलाज करने वाले डॉक्टर से लेकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत करने आतुर हो गए है किसी अस्पताल में मनमाना रूप से फीस लिया जा रहा है तो किसी अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही बरती जा रही है इसी कड़ी में मुंगेली नाका चौक स्थित सनशाइन अस्पताल जिस अस्पताल में आयुष्मान कार्ड के उपयोग पर नोडल एजेंसी ने बैन लगाकर रखा है उक्त अस्पताल के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दायर किया गया है ।
सनशाइन अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ राजेश सिह गौतम को बतौर अभियुक्त बनाया गया है किडनी की समस्या से पीड़ित विशाल सिह की बहन ने अधिवक्ता सुगंधा गुप्ता के माध्यम से माननीय न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी के न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया गया जिसकी सुनवाई करते हुए मजिस्ट्रेट ने उक्त परिवाद को दर्ज करते हुए अगले तारीख में सुनवाई का फैसला किया है।
परिवादिनी स्मृति सिह के अरोपनुसार स्मृति के भाई विशाल सिह के किडनी में स्टोन की समस्या को लेकर सनशाइन अस्पताल में भर्ती कराया गया था भर्ती प्रक्रिया के दौरान स्मृति और उसकी माँ ने आर्थिक समस्या के बारे में बताया जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान कार्ड के माध्यम से बिल भुगतान करने का भरोसा दिया और टेस्ट की रकम 5 हजार रुपए नगद देने कहा गया जिसके बाद 4 हजार नगद और 1 हजार ऑनलाइन के माध्यम से मरीज के परिजनों ने अस्पताल के सुपुर्द किया।
जिसके बाद मरीज को दो दिनों बाद भर्ती किया गया और भर्ती के बाद अस्पताल वालो ने नो कैस पेमेंट के डिक्लियरेशन फॉर्म पर साइन करवा लिया जिसके बाद भी मरीज के परिजनों से दवाई के लिए अस्पताल स्टाफ द्वारा 4 हजार रुपये ऑनलाइन और 6 हजार रुपए नगद लिया गया
इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप
मरीज विशाल सिह को फ्लूड आईवी पर्याप्त मात्रा में नही दिया और डिस्चार्ज कर दिया गया जिसके कारण मरीज को तेज बुखार और अन्य समस्याओं से जूझने का आरोप परिवादिनी मरीज की बहन स्मृति सिह ने सनशाइन अस्पताल पर लगाया है
मामले में थाना सिविल लाइन में शिकायत की गई थी
उक्त मामले को लेकर स्मृति सिह ने सिविल लाइन थाने में भी शिकायत कर चुकी है जिसके बाद मामला न्यायालय में दाखिल किया गया है
किडनी में इंफेक्शन ख़त्म होने के बाद डीजी स्टेंट निकलवाने के लिए नगद 10 हजार की मांग से परेशान मरीज के परिजनों को अन्य अस्पतालों के चक्कर काटने पड़े
परिवादिनी ने अपनी ब्यथा को माननीय प्रथम श्रेणी न्यायधीश के समक्ष कई कड़ियों में रखा है स्मृति के अरोपनुसार आर्थिक समस्या की जानकारी के बाद भी डीजी स्टेंट निकालने के लिए सनशाइन अस्पताल प्रबंधन द्वारा 10 हजार रुपए नगद रकम का मांग किया गया आयुष्मान कार्ड से पैसा भुगतान लेने से इंकार कर दिया गया जिसके बाद मजबूर होकर परिजनों को अन्य अस्पताल में जाकर डीजी स्टेंट को निकलवाना पड़ा
शहर के कुछ निजी अस्पतालों के चलते अन्य निजी अस्पतालों की छवि हो रही खराब
न्यायधानी में चंद निजी अस्पतालों की करतूतों के आगे मरीज इतने हैरान और परेशान हो चुके है कि अस्पताल जाने से पहले मरीज सही अस्पताल और डॉक्टर के बारे में पता करते है अर्थात अपने जान पहचान वालो से मरीज के परिजन मरीज को भर्ती करने से पहले अस्पताल के बारे में रायसुमारी करते है
जिला चिकित्सा कार्यालय में शिकायत के बाद जांच टीम महीनों बीतने के बाद भी जांच पूरी नही कर पा रही है जिसके चलते अस्पतालों में मनमाना फीस से लेकर लापरवाही का मामला बढ़ता ही जा रहा है जिला चिकित्सा कार्यालय में कई गंभीर शिकायत आज भी जांच के नाम पर लंबित पड़ी है