- स्मार्ट मीटर, अनाप-शनाप बिलिंग और भारी अधिभार के खिलाफ बढ़ रहा जनआक्रोश; वर्षों पुराने विवादित बिलों की निष्पक्ष जांच की मांग
मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली शहरी क्षेत्र में बिजली विभाग की कथित मनमानी, स्मार्ट मीटर से जुड़ी बिलिंग संबंधी शिकायतों, बार-बार बिजली कटौती और वर्षों से लंबित विवादित बिलों पर भारी अधिभार लगाए जाने को लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्मार्ट मीटर और कथित अनियमित बिलिंग के विरोध में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के आंदोलित होने के बीच मुंगेली में भी बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि विभाग के कुछ अधिकारी पुराने बकाये की वसूली के लिए वास्तविक उपभोक्ता की स्थिति की जांच किए बिना कनेक्शन विच्छेद जैसी कार्रवाई कर रहे हैं।
~किराएदार के बकाये की सजा मकान मालिक को क्यों?
उपभोक्ताओं की प्रमुख शिकायत उन भवनों से जुड़ी है, जहां वर्षों पहले किराएदार बिजली कनेक्शन का उपयोग करते थे, लेकिन बाद में परिसर छोड़कर चले गए। आरोप है कि किराएदार के समय का बिजली बिल बकाया रहने के बावजूद विभाग ने लंबे समय तक कनेक्शन की वास्तविक स्थिति का सत्यापन नहीं किया और बिलों पर अधिभार जुड़ता रहा। अब पुराने बकाये की वसूली के लिए भवन स्वामी के निजी बिजली कनेक्शन को विच्छेदित करने की कार्रवाई किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
प्रभावित उपभोक्ताओं का सवाल है कि यदि संबंधित किराएदार वर्षों पहले परिसर छोड़ चुका था, तो विभाग ने समय रहते कनेक्शन की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की? बकाया राशि की समय पर समीक्षा, मीटर एवं कनेक्शन की वास्तविक स्थिति का सत्यापन और नियमानुसार वसूली की कार्रवाई क्यों नहीं की गई? वर्षों तक बढ़ते रहे अधिभार का पूरा बोझ वर्तमान भवन स्वामी पर डालना कितना न्यायसंगत है?
उपभोक्ताओं का कहना है कि किसी अन्य व्यक्ति के उपयोग अथवा कथित बकाये की जिम्मेदारी तय किए बिना मकान मालिक का अलग निजी कनेक्शन काटना गंभीर विवाद का विषय है। ऐसे मामलों में कनेक्शनधारक की पहचान, उपभोक्ता अनुबंध, बकाये की अवधि और लागू विद्युत नियमों की जांच आवश्यक है।
~बकायेदारों पर कार्रवाई में कथित दोहरा मापदंड
शहरी क्षेत्र में बिजली बिलों के बड़े बकाये और कथित अवैध डायरेक्ट हुकिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ स्थानों पर भारी बकाया होने के बावजूद बिजली का उपयोग जारी है, जबकि दूसरी ओर विवादित पुराने बिलों के मामलों में आम उपभोक्ताओं पर तत्काल दबाव बनाया जा रहा है।
यदि ऐसी शिकायतें सही हैं, तो विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि बकायेदारों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए समान और पारदर्शी मानदंड क्या हैं। अवैध विद्युत उपयोग के मामलों की जांच तथा नियमानुसार कार्रवाई की स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। उपभोक्ताओं ने सहायक अभियंता (AE) और कनिष्ठ अभियंता (JE) की भूमिका की समीक्षा करने की मांग की है।
~बिजली विच्छेदन के बाद दुर्व्यवहार के आरोप
कुछ उपभोक्ताओं का आरोप है कि कनेक्शन काटे जाने के बाद दूरभाष पर संपर्क करने पर संबंधित कर्मचारियों अथवा अधिकारियों की ओर से अनुचित व्यवहार किया जाता है। यह भी शिकायत है कि दूसरे किराएदार के बकाये की भरपाई कराने के लिए भवन स्वामी के निजी कनेक्शन को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली बिलों से संबंधित विवादों का समाधान नियमों, अभिलेखों और सुनवाई की प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए, न कि कथित दबाव या दुर्व्यवहार के जरिए। विभाग को शिकायतों की जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित करनी चाहिए।
~मीटर रीडिंग और बिलिंग प्रणाली पर भी उठ रहे सवाल
बिजली बिलों में कथित असामान्य वृद्धि के साथ मीटर रीडिंग में गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर भी चर्चाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि मीटर की रीडिंग को प्रभावित करने अथवा मनमाफिक रीडिंग दर्ज कराने के नाम पर अनियमित लेन-देन की आशंका है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि मीटर रीडिंग में हेरफेर या अवैध लेन-देन की कोई शिकायत है, तो विभाग को संबंधित मीटरों की तकनीकी जांच, रीडिंग लॉग, बिलिंग रिकॉर्ड और राजस्व अभिलेखों का स्वतंत्र ऑडिट कराना चाहिए। इससे वास्तविक गड़बड़ी सामने आने पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई और निर्दोष उपभोक्ताओं को राहत मिल सकेगी।
~स्मार्ट मीटर पर बढ़ते असंतोष के बीच विभाग की जवाबदेही जरूरी
स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की आशंकाओं और बिलिंग संबंधी शिकायतों के बीच मुंगेली में लगातार बिजली कटौती तथा बिलों की कथित अनियमितताओं ने परेशानी बढ़ा दी है। उपभोक्ताओं का कहना है कि तकनीकी सुधार के नाम पर लागू की जा रही व्यवस्था का लाभ तभी मिलेगा, जब बिलिंग पारदर्शी हो, मीटर रीडिंग का सत्यापन संभव हो और शिकायतों का समयबद्ध निराकरण किया जाए।
विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं के बिलों की जांच, मीटर परीक्षण और गलत बिल के सुधार की प्रक्रिया क्या है। केवल बकाया दिखाकर कार्रवाई करने के बजाय विवादित राशि की जांच और उपभोक्ता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।
~उपभोक्ताओं ने की निष्पक्ष जांच और राहत की मांग
मुंगेली के प्रभावित उपभोक्ताओं की मांग है कि वर्षों पुराने विवादित बिजली बिलों और उन पर लगाए गए अधिभार की समीक्षा की जाए। किराएदार के समय के बकाये तथा भवन स्वामी के निजी कनेक्शन की देयता का निर्धारण संबंधित अभिलेखों और लागू नियमों के आधार पर किया जाए। गलत बिलिंग पाए जाने पर बिल संशोधित हो तथा अनुचित रूप से वसूली गई राशि का नियमानुसार समायोजन किया जाए।
इसके साथ ही मीटर रीडिंग और बिलिंग रिकॉर्ड का तकनीकी ऑडिट, अवैध हुकिंग की निष्पक्ष जांच, बिजली कटौती की समस्या का समाधान तथा उपभोक्ताओं के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतों पर कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।
अब सवाल यह है कि मुंगेली बिजली विभाग इन शिकायतों पर पारदर्शी जांच कर उपभोक्ताओं को राहत देगा या वर्षों से लंबित विवादित बिल आम लोगों के लिए इसी तरह परेशानी का कारण बने रहेंगे? उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि संबंधित वरिष्ठ अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराएंगे और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।