- नियमित भुगतान के बावजूद कनेक्शन विच्छेद करने के आरोप, एई शादाब खान के व्यवहार को लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी; कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत की तैयारी
मुंगेली। शहरी क्षेत्र में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। उपभोक्ताओं ने विभागीय अधिकारियों पर मनमानी, अनावश्यक रूप से बिजली कनेक्शन काटने और शिकायत करने पहुंचने वालों से अनुचित व्यवहार करने के आरोप लगाए हैं। मामले में संबंधित सहायक अभियंता (एई) शादाब खान की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। नाराज उपभोक्ताओं द्वारा जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करने की तैयारी की बात कही जा रही है।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करने के बावजूद कुछ भवन मालिकों के बिजली कनेक्शन किरायेदारों अथवा परिसर के अन्य उपभोक्ताओं के बकाया बिल के विवाद के चलते काटे जा रहे हैं। उनका कहना है कि आधुनिक बिलिंग व्यवस्था और उपभोक्ता संबंधी रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बावजूद अलग-अलग उपभोक्ताओं के बकाया की स्थिति स्पष्ट करने के बजाय भवन मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
~ नवरात्रि के दौरान कनेक्शन काटने पर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान भी कुछ घरों के बिजली कनेक्शन खंभे से विच्छेदित किए गए। इस कार्रवाई को लेकर उपभोक्ताओं ने नाराजगी जताई है। कुछ लोगों ने धार्मिक भेदभाव की आशंका भी व्यक्त की है, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना और निष्पक्ष जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
~ अधिकारी के कथित व्यवहार से बढ़ी नाराजगी
उपभोक्ताओं का आरोप है कि जब उन्होंने संबंधित अधिकारी के समक्ष अपनी समस्या रखी और कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत करने की बात कही, तब उन्हें कथित तौर पर यह जवाब दिया गया कि वे जहां शिकायत करना चाहें, कर सकते हैं और परिसर में किसी का भी बकाया होने पर भुगतान की जिम्मेदारी भवन मालिक की होगी। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, बातचीत का लहजा भी आपत्तिजनक था।
इन आरोपों के बाद कुछ उपभोक्ताओं ने संबंधित कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्या रखने की बात कही है। उनका कहना है कि शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं होने से आम नागरिकों की परेशानी बढ़ रही है। हालांकि, संबंधित अधिकारी और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
~ बकाया वसूली और राजस्व नुकसान की भी हो जांच
मामले में उपभोक्ताओं ने बिजली बिलों के बकाया, कनेक्शन विच्छेदन की प्रक्रिया और नए कनेक्शन जारी करने के नियमों की जांच की मांग उठाई है। आरोप है कि कुछ परिसरों में पुराने बकाया और नए कनेक्शन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता का अभाव है। इन परिस्थितियों में विभागीय राजस्व को संभावित नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है।
हालांकि, भ्रष्टाचार या राजस्व हानि के आरोपों की पुष्टि दस्तावेजों, बिलिंग रिकॉर्ड और विभागीय जांच के आधार पर ही की जा सकती है। इसलिए यह आवश्यक है कि विभाग ऐसे सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे।
~ जिला प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें
अब निगाहें जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं। उपभोक्ताओं की मांग है कि कनेक्शन काटने के प्रत्येक मामले की जांच की जाए, बिल भुगतान एवं बकाया संबंधी रिकॉर्ड का मिलान हो तथा शिकायतों के निपटारे में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
यदि किसी अधिकारी द्वारा नियमों के विरुद्ध कार्रवाई, अनुचित व्यवहार या पद का दुरुपयोग किया जाना प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, धार्मिक भेदभाव के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि किसी भी उपभोक्ता के साथ धर्म, आर्थिक स्थिति या अन्य किसी आधार पर भेदभाव न हो।
जनहित का सवाल यह है कि क्या विद्युत विभाग उपभोक्ताओं की शिकायतों का निष्पक्ष निराकरण कर पाएगा और कनेक्शन विच्छेदन तथा बकाया वसूली की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा? अब प्रशासनिक जांच और विभागीय जवाबदेही से ही मामले की वास्तविकता सामने आ सकेगी।