मुंगेली के अस्थाई कलेक्टर निवास को ‘महतारी सदन’ बनाने की उठ रही मांग

मुंगेली। राज्य सरकार के सुप्रीम टारगेट्स वाले कामों के महिलाओं के सम्मान के लिए हर जिले में महतारी सदन बनाए जाने की भी योजना है। मुंगेली जिले के जिला मुख्यालय के अधिकांश प्रशासनिक आधिकारियों के अस्थाई निवास जो कि वर्षों पूर्व खाली करवाकर अब तक उसमें नया रूप जनप्रतिनिधियों को दे दिया जाना चाहिए था मगर जिला प्रशासन के सारे प्रमुख अधिकारियों के लिए वर्षों पूर्व बन चुके स्थाई निवास के बावजूद पुराने अस्थाई बंगलो से मोह नहीं जाने के कारण ये सारे शासकीय जगह इन अधिकारियों के समक्ष बलात कब्जे जैसे ही माना जा सकता है।

कहने को अभी हाल फिलहाल में जिला प्रशासन स्वयं छोटे छोटे जीवन यापन कर रहे लोगों के टपरी और अस्थाई अतिक्रमण तोड़ सुव्यवस्थित शहर बनाने का बीड़ा उठाया मगर उन अधिकारियों द्वारा स्वयं के बलात कब्जों को कभी संज्ञान में नहीं लिया गया इसके अलावा इन बलात कब्जों के लिए जनप्रतिनिधियों ने भी चुप्पी साधी रही जिसके कारण आज छोटी छोटी जगहों के लिए स्थल चयनित ना हो पाने अथवा सरकारी जगह खाली नहीं रहने का रोना रोया जा रहा है मगर इन बलात कब्जा धारियो से वो स्थाई निवास को खाली नहीं कराया गया है।

मालूम हो जब 2012 में मुंगेली जिले का निर्माण हुआ तब अस्थायी अधिकारियों के बंगले ब्लॉक स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों के बंगले को ही अपग्रेड कर बनाया गया और ये सभी बंगले जिला मुख्यालय के करही ग्राम पंचायत अंतर्गत ही है उसके बाद इन सभी जिला प्रशासन के बड़े अधिकारियों के लिए स्थायी बंगले के लिए स्थल चयन कर खेड़ा/लिम्हा ग्राम पंचायत अंतर्गत स्थाई तौर पर बंगले बनवाकर संबंधित अधिकारियों को सुपुर्द भी कर दिए गये मगर ये अधिकारी आज पर्यन्त तक उन बंगलो में शिफ्ट होने की बजाय अपने लिए आवंटित बंगले और किसी किसी को देकर इसी अस्थाई बंगले में रहना उचित समझा जो भी एक बलात कब्जा अथवा अतिक्रमण के श्रेणी में आता है। मगर मुंगेली जिले में अभी के हालात में ‘Boss Is Always Right’ की तर्ज पर सब कुछ होने के कारण स्थाई जनप्रतिनिधि भी शरणागत भाव में दिख रहे है।

–महतारी सदन के लिए अस्थाई प्रशासनिक बंगले को कराया जाए खाली

अस्थाई प्रशासनिक बंगले को महतारी सदन और भी सरकार के सुप्रीम टारगेट प्रोजेक्ट से बेहतर रूप दिया जाना असल में मुंगेली के लिए विकास जैसा होगा। मगर इन सब काम के लिए क्षेत्रीय विधायक पुन्नूलाल मोहले का भी वर्तमान विधायकी में मौन मूकदर्शक होकर सब कुछ मौन सहमति देने जैसा हो गया है। इन सबके मद्देनजर चर्चा तो यह भी है कि छत्तीसगढ़ राज्य अंतर्गत विधानसभा में सबसे वरिष्ठ विधायक और भारत वर्ष में सबसे वरिष्ठ अनुसूचित जाति के कद्दावर,ईमानदार नेता के रूप में जाने पहचाने जाने वाले विधायक पुन्नूलाल मोहले को नियंत्रित रखने की एक कवायद की गई हो। बावजूद वर्तमान राजनैतिक समीकरणों के चलते विधायक मोहले स्वयं पस्त और शिकस्त जैसे महसूस भी कर रहे हो तो कोई आश्चर्य की बात नहीं।

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