- रेलवे के वीवीआईपी कोटे पर उठे सवाल, आपात यात्रा में यात्री को परेशानी का सामना
बिलासपुर। रेलवे में वेटिंग टिकट के कन्फर्मेशन को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के कार्यालय की ओर से विधिवत भेजी गई अनुशंसा के बावजूद संबंधित यात्री का टिकट कन्फर्म नहीं हो सका। यात्रा की निर्धारित तिथि नजदीक आने के बावजूद टिकट कन्फर्मेशन नहीं होने से यात्री को आपात स्थिति में यात्रा को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
-कार्यालय से भेजा गया अनुशंसा पत्र, फिर भी नहीं हुआ टिकट कन्फर्म
जानकारी के अनुसार, संबंधित यात्री की यात्रा आपात परिस्थितियों में आवश्यक थी। टिकट के वेटिंग में होने के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के कार्यालय से रेलवे के संबंधित अधिकारियों के नाम विधिवत अनुशंसा पत्र भेजा गया। इसके बावजूद यात्रा की तारीख तक टिकट कन्फर्म नहीं हो पाया।
इस घटनाक्रम ने रेलवे में वीवीआईपी अथवा विशेष कोटे के तहत टिकट कन्फर्मेशन की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि यदि किसी केंद्रीय मंत्री के कार्यालय से विधिवत अनुशंसा भेजे जाने के बाद भी जरूरतमंद यात्री को राहत नहीं मिलती, तो सामान्य यात्री आखिर किस व्यवस्था के भरोसे रहे?
-‘मुंह जुबानी निवेदन’ से काम होने के आरोप
इस मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि रेलवे के बड़े अधिकारियों से संबंधित लोगों के मौखिक निवेदन पर कई बार टिकट कन्फर्म होने की बात कही जाती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि ऐसा होता है तो यह रेलवे की आरक्षण व्यवस्था में समानता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
-क्या अनुशंसा पत्र केवल औपचारिकता बनकर रह गया?
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मंत्री कार्यालय की ओर से यात्री को अनुशंसा पत्र उपलब्ध कराया गया और संबंधित रेलवे अधिकारियों को भी पत्र भेजे जाने की जानकारी दी गई। ऐसे में यात्री के सामने यह स्थिति बन गई कि उसे उम्मीद थी कि मंत्री कार्यालय की अनुशंसा के आधार पर यात्रा से पहले टिकट कन्फर्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
यात्री पक्ष की नाराजगी इस बात को लेकर है कि यदि अनुशंसा पर वास्तविक कार्रवाई ही नहीं होनी है, तो फिर जरूरतमंद व्यक्ति को पत्र देकर आश्वस्त करने का औचित्य क्या है? इससे यह धारणा बनती है कि पूरी प्रक्रिया कहीं केवल औपचारिकता तक सीमित तो नहीं रह गई है।
-आपात यात्रा में बढ़ी परेशानी
यात्रा आपात स्थिति से जुड़ी होने के कारण टिकट कन्फर्म नहीं होने का असर सीधे यात्री पर पड़ा। निर्धारित यात्रा तिथि पर बिना कन्फर्म टिकट के यात्रा करना या वैकल्पिक व्यवस्था तलाशना यात्री के लिए परेशानी का कारण बन गया।
मामले ने मंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि कार्यालय से अनुशंसा भेजे जाने के बावजूद यात्रियों को अपेक्षित राहत नहीं मिल रही है, तो संबंधित टीम और रेलवे के बीच समन्वय की व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की जरूरत महसूस होती है।
-रेलवे से स्पष्टता की मांग
इस पूरे मामले में रेलवे से यह स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है कि वीवीआईपी अथवा विशेष कोटे में टिकट कन्फर्मेशन के लिए अनुशंसा पत्रों पर किस प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि मंत्री अथवा जनप्रतिनिधि के कार्यालय से भेजी गई विधिवत अनुशंसा का निर्णय किस स्तर पर और किन नियमों के तहत लिया जाता है।
फिलहाल, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के कार्यालय की अनुशंसा के बावजूद संबंधित यात्री का टिकट कन्फर्म नहीं होने का यह मामला रेलवे की आरक्षण व्यवस्था, वीआईपी कोटे की उपयोगिता और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर कई सवाल छोड़ रहा है।