लोरमी। नगर पालिका परिषद लोरमी के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में इन दिनों कोटवारी भूमि पर धड़ल्ले से दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे इस निर्माण कार्य ने स्थानीय निवासियों और जागरूक नागरिकों के बीच चिंता पैदा कर दी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्य मार्ग और रिहायशी इलाकों के समीप हो रहे इस अवैध कब्जे को लेकर शासन-प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी फिलहाल मौन साधे हुए हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर के डिंडोल मार्ग में स्थित कोटवारी भूमि, जो शासन द्वारा विशेष प्रयोजनों के लिए आरक्षित होती है, उस पर कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा पक्का निर्माण कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निर्माण कार्य रातों-रात नहीं, बल्कि पिछले कई दिनों से दिनदहाड़े चल रहा है।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर संशय-
आमतौर पर किसी भी छोटे निर्माण के लिए नगर पालिका से अनुमति लेना अनिवार्य होता है, लेकिन कोटवारी जमीन पर व्यवसायिक दुकानों का ढांचा खड़ा हो जाने के बावजूद अब तक किसी भी विभाग द्वारा इस पर रोक नहीं लगाई गई है। तहसील कार्यालय और नगर पालिका प्रशासन की इस “मौन सहमति” ने कई तरह के प्रशासनिक संदेहों को जन्म दे दिया है।
जनता में बढ़ता असंतोष-
नगरवासियों का तर्क है कि यदि इसी तरह सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे होते रहे, तो भविष्य में सार्वजनिक विकास कार्यों के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो पाएगी। लोगों ने मांग की है कि उच्चाधिकारी इस मामले में तत्काल संज्ञान लें और निर्माण कार्य की वैधता की जांच कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें।