मुख्यमंत्री के बिलासपुर संभागीय समीक्षा बैठक में मुंगेली के SSP भोजराम पटेल के बिना टोपी रहने की हो रही चर्चा

पुलिस की शान वर्दी और टाेपी,फिर भी जवान से लेकर IPS अफसर तक को परहेज

“पुलिस विभाग में एसपी (पुलिस अधीक्षक) द्वारा बिना टोपी लगाए समीक्षा बैठक (Review Meeting) लेना पूरी तरह से विभागीय नियमों और वर्दी के निर्धारित प्रोटोकॉल के खिलाफ है। पुलिस मैनुअल के अनुसार, जब भी अधिकारी या कर्मचारी आधिकारिक वर्दी पहनकर किसी भी बैठक, परेड या आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल होते हैं, तो उन्हें प्रॉपर हेडगियर (टोपी/कैप) पहनना अनिवार्य होता है।”

बिलासपुर। पुलिस की शान उसकी वर्दी और टोपी… इसी के भरोसे तो आम लोग उन्हें कानून का रखवाला मानते हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में चल रही समीक्षा बैठक में भी एक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा बिना टोपी मीटिंग में रहना चर्चा का विषय बना हुआ है जबकि वहां मौजूद अन्य पुलिस के तमाम बड़े अफसर भी टोपी लगाकर पूरे अनुशासित ढंग से शिरकत किए। फिर सिर-माथे रखी जाने वाली टोपी के तो क्या कहने…नतीजा, वे उसे मरोड़कर कमर से लगे बेल्ट या फिर जेब में ठूंस लेते हैं। इस बैठक में इस गंभीर मसले के अलावा भी प्रायः कोई बाइक के हैंडल में लटकाकर रखता है तो कोई उसमें लगे बैग में डाल देता है। थानों तक में इन्हें यहां-वहां टेबल पर पड़े देखा जा सकता है। यह अनुशासनहीनता है तो टोपी का अपमान भी।


पुलिस के लिए टोपी पहनना उतना ही जरूरी है जितना पेंट-शर्ट, वर्दी पर नेम प्लेट, नंबर बैज, बेल्ट और जूते-मोजे। इनमें से कोई एक मौजूद न हो तो वर्दी पूरी नहीं मानी जाती। ट्रेनिंग में खासतौर पर इसकी जानकारी दी जाती है, महत्व समझाया जाता है। इसके बाद सेवा में आते ही उन्हें कैप पहनना अच्छा नहीं लगता।

– ट्रेनिंग के दौरान खूब पढ़ाया जाता है पाठ, खाकी यूनिफॉर्म है पुलिस की आन बान शान

छग पुलिस में सिपाही से लेकर अफसर तक की कैप नीले रंग की होती है। काॅन्स्टेबल व हेड काॅन्स्टेबल की टोपी कौआ टोपी कहलाती है। एएसआई से लेकर डीजी तक बेरिट कैप पहनते हैं। टोपियों में छग पुलिस लिखा होता है और नीचे विभाग का मोनो होता है। पीएसपी से सलेक्ट होकर डीएसपी बनेे अफसर की टोपी में छग पुलिस की जगह सीपीएस अंकित होता है। आईपीएस हैं तो उनकी टोपी में आईपीएस मिलेगा।

–पुलिस रेग्युलेशन की धारा का उल्लंघन

पुलिस रेग्युलेशन की धारा 64 के तहत जवान या अफसर यूनिफाॅर्म में हैं तो स्पोर्ट्स शू नहीं पहन सकते। इसके तहत पुलिस निर्धारित वेशभूषा में ही रहेगी। वे कभी भी आंशिक या मुफ्ती वर्दी में नहीं रहेगी। ऐसा करने पर अनुशासनहीनता माना जाएगा। साथ ट्रेनिंग पूरी होने के बाद सिपाही मरते दम तक वर्दी की रक्षा करने की कसम खाते हैं।

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