रायगढ़:आज एसडीएम ऑफिस में उस समय बवाल मच गया है। जब तहसीलदार सुनील अग्रवाल के रवैए से नाखुश जिला अधिवक्ता संघ रायगढ़ के वकील लामबंद होकर तहसीलदार के विरोध में नारे लगाने लगे। उसी दौरान मामला कुछ गड़बड़ा गया और आक्रोशित वकीलों ने दफ्तर में ड्यूटी कर रहे चपरासी के साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया। अपने साथी कर्मचारी के साथ मारपीट की जानकारी मिलते ही एसडीएम ऑफिस के सभी कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया और उन्होंने सरकारी दफ्तरों को बंद करने का ऐलान करते हुए कार्यालय के सभी दफ्तरों में ताले लगा दिए।
पीड़ित कर्मचारी के उच्चअधिकारियों व सहकर्मियों का कहना है कि जब तक इस मामले में कोई बड़ी कार्यवाही नहीं होगी तब तक सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे। वकीलों ने कर्मचारी से जिस प्रकार से मारपीट किए हैं उसका वीडियो स्थानीय मीडिया में प्रकाशित होने पर पूरे शहर में आग की भांति फैल चुकी है। समस्त कर्मचारी पीड़ित कर्मचारी के पक्ष में खड़े हुए हैं और कानूनी कार्यवाही के लिए नामजद शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में लगे हुए हैं और कार्यालय के सामने धरने पर बैठकर मारपीट करने वाले वकीलों पर कार्यवाही की मांग कर रहे हैं।
दूसरी तरफ जिला अधिवक्ता संघ के वकील जितेंद्र शर्मा के साथ तहसीलदार ने कल दुर्व्यवहार किया था जिसके बाद अब मामला गरमा गया है। अपने साथी अधिवक्ता के साथ तहसीलदार द्वारा गाली-गलौच व अभद्रता करने के व्यवहार से नाखुश जिला अधिवक्ता संघ के सैकड़ों वकीलों ने आज तहसील ऑफिस का घेराव कर दिया और और तहसीलदार के खिलाफ हल्ला बोल दिया। जिला अधिवक्ता संघ ने तहसीलदार सुनील अग्रवाल पर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है और कार्रवाई न करने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है।
रायगढ़ जिला न्यायालय के वरिष्ठ वकील जितेंद्र लाल शर्मा कल किसी काम से तहसील ऑफिस गए हुए थे जहां उन्होंने तहसीलदार सुनील अग्रवाल से किसी काम को लेकर बातचीत की तहसीलदार सुनील अग्रवाल द्वारा उनके साथ गाली गलौच करते हुए उनके साथ अभद्र व्यवहार और अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा तहसील परिसर से धक्के मारकर बाहर निकालवा दिया। श्री शर्मा के साथ तहसीलदार द्वारा अभद्रतापूर्ण व्यवहार करने का मामला जब जिला अधिवक्ता संघ के पास आया तो सभी वकील लामबंद हुए आज दोपहर जिला अधिवक्ता संघ के बैनर तले तहसील परिसर में अपना विरोध प्रदर्शन करने पहुंच तहसीलदार सुनील अग्रवाल के खिलाफ जमकर नारेबाजी लगाते हुए अपना विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।


इस मामले में मीडिया से मुखातिब होते हुए जिला अधिवक्ता संघ के युवा अधिवक्ता आशीष मिश्रा ने कहा कि उनके वरिष्ठ अधिवक्ता जितेंद्र लाल शर्मा के साथ तहसीलदार ने अभद्रता पूर्ण व्यवहार करते हुए अपने न्यायालय में परिसर में मारपीट की और धक्के मरवाकर अपने न्यायालय से बाहर निकाल दिया गया। मेरी यह समझ में नहीं आता कि यह कैसा प्रशासन है? गेरवानी में इनका हार्डवेयर का दुकान है उस दुकान में जो व्यापारी बैठकर व्यापार करता था आज रायगढ़ का तहसीलदारी कर रहा है। लगातार फैसले बिना किसी मतलब के फैसले ले रहा है बिना किसी मतलब के प्रोसेडिंग को कंप्लीट करके अपने बैग में रख लिया जाता है। जो पैसा देता है उसके पक्ष में फैसला हो जाता है। हमारे आंख के सामने फैसले बिकते हैं और हम वकील होने के नाते क्या यह सब देखते रहे? क्या एक वकील के साथ न्यायालय में इस तरह का दुर्व्यवहार व मारपीट होना चाहिए? आशीष मिश्रा ने कहा कि तहसीलदार को यह पहले से जानकारी थी कि हमारे यहां आमसभा हो रही है और तहसीलदार ने जानबूझकर असामाजिक तत्वों को बुलाकर यहां रखा था। और हमारे प्रवेश करने के पहले ही उन्होंने अपने लोगों को बोलकर कार्यालय में तोड़फोड़ शुरू कर दी ताकि हमारे ऊपर सारे आरोप लगाया जा सके।


आशीष मिश्रा ने कहा कि तहसीलदार जब सारंगढ़ में पदस्थ थे तब भी इनके ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगा था तब इन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को दबा दिया था समझौता करा दिया था। शासकीय नियमावली के तहत मूलनिवासी जिला के अधिकारी का उसके जिले में पोस्टिंग नहीं हो सकता लेकिन इसके बावजूद तहसीलदार यहां जमे हुए हैं।
रायगढ़ पदस्थापना के दौरान इनका सारंगढ़ ट्रांसफर किया गया लेकिन अभूतपूर्व तरीके से उनका ट्रांसफर 3 दिन में ही रुक गया। लगातार इनके न्यायालय में फैसले बिक रहे हैं। गरीब आदमी जो बिना चप्पल के तहसील में न्याय पाने की आशा के साथ आता है क्या उससे कमाई करना उचित है?
भ्रष्टाचारों में शामिल हैं तहसीलदार
अधिवक्ता आशीष मिश्रा ने आरोप लगाते हुए कहा कि तहसीलदार व उनके परिवार वालों के खातों की जांच होना चाहिए। तब आपको मालूम चलेगा कि ये भारत के सबसे बड़े भ्रष्टाचारों में शामिल हैं। अगर तहसीलदार के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं होती है तो जिला अधिवक्ता संघ अनिश्चितकालीन हड़ताल करेगी और छत्तीसगढ़ के समस्त रेवेन्यू कोर्ट के अधिवक्ताओं को संगठित कर पूरी व्यवस्था को बदलने का प्रयास किया जाएगा।
फिलहाल सत्र न्यायालय के गेट में सांकेतिक ताले बंदी की है जिसकी वजह से पुलिस बल भी मौजूद है तो वहीं अधिवक्ता संघ भी अपनी मांगों को लेकर उड़ चुका है। इस वक्त चक्रधर नगर थाने में दोनों ही पक्ष अपने अपने पक्ष को रखते हुए कार्यवाही की मांग कर रहे हैं और मामला काफी गंभीर होता जा रहा है चकरनगर पुलिस मामले में एफ आई आर दर्ज करने की तैयारी कर रही है।
बहरहाल तहसीलदार सुनील अग्रवाल के कारण जिला अधिवक्ता संघ और तहसील कार्यालय के कर्मचारी आमने- सामने हैं और दोनों ही पक्ष कार्यवाही की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह है कि आगे प्रशासन क्या करती है? एक तरफ जिला अधिवक्ता संघ के वकील जितेंद्र शर्मा पर तहसीलदार के ऊपर अभद्रता का आरोप लगाया गया है तो है दूसरी तरफ तहसील ऑफिस के कर्मचारियों ने वकीलों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने उनके साथी कर्मचारी से मारपीट की है। अपर कलेक्टर कुरुवंशी जांच के बाद कार्यवाही करने की बाद कर रहें हैं।