राष्ट्रीय सोशल मीडिया चेयरमैन आदित्य भगत के साथ सरगुजा जिले में शिक्षा बचाओ देश बचाओ अभियान का किया आगाज़
एनएसयूआई के राष्ट्रीय संचार प्रमुख के भाषण दौरान विघ्नसंतोषी लोगो ने डाला खलल,माइक बन्द होने से कार्यकर्ता बिफरे,पुलिस को करनी पड़ी मशक्कत
अम्बिकापुर। कई व्यवधान के बावजूद आज शिक्षा बचाओ देश बचाओ के तहत एनएसयूआई का कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आज एनएसयूआई छत्तीसगढ़ के नवनियुक्त अध्यक्ष नीरज पांडेय का पहली बार सरगुजा जिला आगमन हुआ था। उनके साथ एनएसयूआई राष्ट्रीय सोशल मीडिया चेयरमैन आदित्य भगत भी थे, अंबिकापुर पहुँचने पर दोनों का भव्य स्वागत किया गया। यह कार्यक्रम राजीव भवन, अंबिकापुर में प्रस्तावित था, मगर अन्य कार्यक्रम का हवाला देते हुए राजीव भवन में एनएसयूआई को कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी गई। इस पर एनएसयूआई के सदस्यों का कहना है कि राजीव भवन में दो कमरे खाली थे, मगर उन्हें जगह नहीं दी गई।
इस दौरान अन्य लोगों ने जमकर उत्पात मचाया और पोस्टर फाड़े और माइक भी फेंक दिया गया, कहा गया कि यह नो फ्लेक्स ज़ोन है। इस पर एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय ने कहा “अगर वो नो फ्लेक्स ज़ोन था तो पोस्टर हटाया जा सकता था, तोड़ने की या फाड़ने की ज़रूरत नहीं थी।”
एनएसयूआई के कार्यक्रम में दूर-दूराज के क्षेत्रों से छात्र संगठन के लोग आकर शामिल हुए थे, छात्रों में ज़बरदस्त उत्साह था। एनएसयूआई के नवनियुक्त अध्यक्ष नीरज पांडेय के साथ-साथ लोगों शिक्षा बचाओ देश बचाओ आंदोलन का भी स्वागत किया। जिस तरह आज़ादी के लिये कांग्रेस ने ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध जंग लड़ी थी उसी तर्ज़ पर एनएसयूआई केंद्र सरकार की छात्र व देश विरोधी नीतियों के विरुद्ध आंदोलन कर रही है। हालांकि इस बीच कई व्यवधान आए, उद्बोधन के दौरान एनएसयूआई राष्ट्रीय सोशल मीडिया चेयरमैन आदित्य भगत का माइक बंद कर दिया गया था।
इस पर आक्रोश व्यक्त करते हुए एनएसयूआई छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय ने कहा, “यह कांग्रेस की विचारधारा के विरुद्ध है, कांग्रेस ने कभी विरोधियों की आवाज़ को भी रोकने की कोशिश नहीं की। यहाँ जनहित के मुद्दे पर हो रहे कार्यक्रम को बाधित किया गया। यह हरकत कांग्रेस की पार्टी लाइन के विरुद्ध है।”
आदित्य भगत ने कहा कि “यह केंद्र सरकार के विरुद्ध वैचारिक लड़ाई नहीं बल्कि जनता के मुद्दों, देश के हितों और अधिकारों की लड़ाई है। केंद्र सरकार की नीति छात्रों और युवाओं के विरुद्ध है, लगातार शासकीय उपक्रमों का निजीकरण हो रहा है, रोजगार खत्म हो गये हैं, ऐसे में सबको एकजुट होने की ज़रूरत है। बड़े दुःख की बात है कि कुछ उत्पाती तत्व मौके की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं”
गौरतलब है कि केंद्र सरकार की निजीकरण और छात्र विरोधी नीतियों के विरुद्ध एनएसयूआई का देशव्यापी अभियान चल रहा है।





