- इस योजना अंतर्गत लालाकापा में 200 पौधों का रोपण
- ग्राम पंचायत व ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प
मुंगेली। जिले के ग्राम पंचायत लालाकापा में पर्यावरण संरक्षण एवं हरित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों की सहभागिता से 200 पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम में सभी ने पौधरोपण के साथ उनकी सुरक्षा और नियमित देखभाल का भी संकल्प लिया।
पौधरोपण कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। अधिक से अधिक पौधे लगाकर ही जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना किया जा सकता है तथा आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है। ग्रामीणों ने अभियान को सफल बनाने के लिए भविष्य में भी पौधारोपण जारी रखने का संकल्प लिया।
प्रधान विपिन ठाकुर ने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मां के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक सार्थक माध्यम है। उन्होंने कहा कि पौधों का संरक्षण करना भी उतना ही आवश्यक है जितना उनका रोपण करना। यदि हर व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी निभाए, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। उन्होंने सभी ग्रामीणों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की।
कार्यक्रम के अंत में ग्रामवासियों ने संदेश दिया कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है। ग्रामीणों ने कहा कि पौधे केवल हरियाली ही नहीं बढ़ाते, बल्कि स्वच्छ हवा, जल संरक्षण और जैव विविधता को भी बढ़ावा देते हैं। इस सामूहिक पहल से ग्राम लालाकापा ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में ग्राम पंचायत लालाकापा के उप सरपंच रामफल नेताम, प्रधान विपिन ठाकुर, पंचायत सचिव रामकुमार साहू, रोजगार सहायक भरत साहू, मनीष परिहार, शिवशंकर सिंह, धनु साहू, रामायण कोटवार, प्रीत दास, गोलू यादव, मास्टर साहू, भजन साहू, ईकेश्वर दिवाकर, हेमंत ठाकुर, सजल सिंह, रवि तिवारी, वीरेंद्र दाहिरे, श्यामू नाऊ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने पौधों को नियमित रूप से संरक्षित करने और उनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी भी ली।