“मुंगेली PWD के अनुविभागीय कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी पर काम के अनुरूप जिम्मेदारी नहीं देने का आरोप, दैनिक वेतनभोगियों से वाहन चलाने का भी दावा”
मुंगेली। लोक निर्माण विभाग, मुंगेली के अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय में पदस्थ एक रोलर ड्राइवर को कथित तौर पर लंबे समय से उसके पद के अनुरूप कार्य नहीं दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पिछले करीब 15 वर्षों से कर्मचारी को रोलर संचालन सहित संबंधित कार्य में नहीं लगाया गया, इसके बावजूद उसे नियमित रूप से वेतन और शासकीय सुविधाओं का लाभ मिलता रहा। आरोप लगाने वालों का दावा है कि इस अवधि में वेतन के रूप में सरकारी खजाने से एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च हो चुकी है। हालांकि, इस राशि और कर्मचारी की वास्तविक कार्यस्थिति की पुष्टि विभागीय रिकॉर्ड से होना बाकी है।
–अनुकंपा नियुक्ति के बाद से पदस्थ होने का दावा
बताया गया है कि संबंधित कर्मचारी की नियुक्ति अनुकंपा के आधार पर रोलर ड्राइवर के पद पर हुई थी। इसके बाद वह मुंगेली स्थित लोक निर्माण विभाग के सब डिवीजन कार्यालय में पदस्थ रहा। आरोप है कि विभागीय कार्यप्रणाली में बदलाव और अधिकांश निर्माण कार्यों के निविदा आधारित होने के बावजूद कर्मचारी को उसके मूल पद के अनुरूप नियमित कार्य नहीं सौंपा गया।
–विभागीय काम कम, फिर भी पद पर कायम
लोक निर्माण विभाग में पिछले कई वर्षों से निर्माण एवं अन्य कार्यों का बड़ा हिस्सा निविदा प्रक्रिया के माध्यम से कराया जा रहा है। ऐसे में विभागीय रोलर संचालन और भारी वाहन संबंधी कार्यों की वास्तविक आवश्यकता का आकलन किए जाने की मांग उठ रही है। सवाल यह भी है कि यदि मुंगेली सब डिवीजन में संबंधित पद पर नियमित काम उपलब्ध नहीं है तो कर्मचारी की सेवाएं विभाग की आवश्यकता वाले किसी अन्य कार्यालय या स्थान पर क्यों नहीं ली जा रही हैं।
–दैनिक वेतनभोगियों से वाहन संचालन का आरोप
मामले में एक और गंभीर आरोप यह है कि जिन कार्यों में संबंधित कर्मचारी की सेवाओं का उपयोग किया जा सकता था, उनके लिए कथित तौर पर दैनिक वेतनभोगियों को अलग से लगाया जाता है और विभाग पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ता है। यदि यह तथ्य रिकॉर्ड से सही साबित होता है तो विभागीय स्तर पर मानव संसाधन के उपयोग और सरकारी धन के व्यय को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
–अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे सवाल
कर्मचारी को लंबे समय से पदस्थ रखे जाने के बावजूद उसके कार्य आवंटन अथवा पद की उपयोगिता को लेकर उच्च अधिकारियों को जानकारी दी गई या नहीं, यह भी जांच का विषय है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि संबंधित पद पर पर्याप्त काम उपलब्ध नहीं है तो सक्षम अधिकारी ने अब तक कर्मचारी को विभाग की आवश्यकता के अनुरूप किसी अन्य स्थान पर पदस्थ करने अथवा वैकल्पिक कार्य सौंपने की पहल क्यों नहीं की।
–जिला प्रशासन से जांच की मांग
मामले को लेकर जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की जा रही है। जांच में कर्मचारी की पदस्थापना, उपस्थिति, कार्य आवंटन, वेतन भुगतान, पिछले वर्षों में किए गए कार्य तथा विभाग द्वारा दैनिक वेतनभोगियों पर किए गए खर्च का मिलान किया जा सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित कर्मचारी को उसके पद के अनुरूप कार्य क्यों नहीं दिया गया।
– अब विभाग के रुख पर नजर
मामला सामने आने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लोक निर्माण विभाग संबंधित कर्मचारी की सेवाओं का उपयोग विभागीय आवश्यकता के अनुसार किसी अन्य कार्यालय में करता है या वर्तमान पदस्थापना में ही रखता है। साथ ही विभागीय अधिकारियों से यह अपेक्षा रहेगी कि वे लंबे समय से लंबित इस मामले में रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करें और यदि सरकारी धन के अनावश्यक व्यय की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई करें।