- मुंगेली में जमीन रजिस्ट्री पर ‘मौखिक फरमान’ का आरोप,
पंजीयन मुख्यालय के निर्देशों की अनदेखी का दावा - नए कलेक्टर से समाधान की उम्मीद
मुंगेली। मुंगेली ब्लॉक में जमीनों की रजिस्ट्री को लेकर लंबे समय से चले आ रहे कथित प्रशासनिक हस्तक्षेप और मौखिक निर्देशों से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई के नाम पर व्यपवर्तित भूमि तथा पांच डिसमिल या उससे अधिक रकबे की रजिस्ट्री भी कई मामलों में रोक दी गई है। इससे जहां जमीन मालिक और खरीदार परेशान हैं, वहीं शासन को मिलने वाले पंजीयन राजस्व में भी नुकसान होने की बात कही जा रही है।
– अवैध प्लाटिंग के नाम पर रजिस्ट्रियों पर रोक का आरोप
बताया जा रहा है कि राज्य सरकार द्वारा पांच डिसमिल या उससे अधिक रकबे की भूमि की रजिस्ट्री को लेकर लिए गए निर्णय के बावजूद मुंगेली ब्लॉक में अनेक मामलों में पंजीयन प्रक्रिया सुचारू नहीं हो पाई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध प्लाटिंग की रोकथाम के नाम पर पूरे क्षेत्र में व्यापक स्तर पर रजिस्ट्रियां प्रभावित की जा रही हैं, जबकि कार्रवाई चिन्हित मामलों तक सीमित होनी चाहिए।
लोगों का कहना है कि यदि किसी विशेष खसरे अथवा भूमि पर अवैध प्लाटिंग का मामला है तो नियमानुसार उसी भूमि के संबंध में कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके बजाय पूरे क्षेत्र में रजिस्ट्री प्रक्रिया प्रभावित होने से वैध भूमि के खरीदार और विक्रेता भी परेशानी झेल रहे हैं।
– पंजीयन मुख्यालय के निर्देशों की अनदेखी का दावा
स्थानीय लोगों के अनुसार, राज्य पंजीयन मुख्यालय द्वारा पूर्व में रजिस्ट्री प्रक्रिया में अनावश्यक मैनुअल हस्तक्षेप और नजरी नक्शा जैसी बाध्यताओं को समाप्त करने के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत नए सॉफ्टवेयर में दर्ज खसरा विवरण, भूमि स्वामी के नाम तथा बी-1 अभिलेख के आधार पर पंजीयन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की व्यवस्था पर जोर दिया गया था।
आरोप है कि इसके बावजूद मुंगेली ब्लॉक में राजस्व अधिकारियों के स्तर से मौखिक निर्देशों के आधार पर रजिस्ट्रियों को प्रभावित किया जा रहा है। इससे पंजीयन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकार क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
– करोड़ों के राजस्व पर असर पड़ने की बात
रजिस्ट्री नहीं होने से केवल आम लोगों को ही परेशानी नहीं हो रही, बल्कि शासन को मिलने वाले पंजीयन शुल्क और अन्य संबंधित राजस्व पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वैध रजिस्ट्रियों को अनिश्चितकाल तक रोकने के बजाय शासन को स्पष्ट लिखित नियम और पारदर्शी प्रक्रिया लागू करनी चाहिए, ताकि अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई भी हो और वैध लेन-देन बाधित न हो।
– मीडिया के समक्ष पक्ष देने अधिकारी करते हैं आनाकानी
इस गंभीर मुद्दे में जब जब आम जन मानस अथवा मीडिया के माध्यम से बात अधिकारियों के समक्ष रखी है तब तब पंजीयन दफ्तर के अधिकारी राजस्व अधिकारी और राजस्व के अधिकारी पंजीयन दफ्तर के सहारे अपना पक्ष देने से बचते रहे जिसके कारण आज तक इस गंभीर प्रवृत्ति के असल कसूरवार का खुलासा होना मुश्किल जैसा रहा। मगर अधिकारियों के कैमरे के समक्ष मुंह छुपाने अथवा गंभीर राजस्व क्षति को रोकने का प्रयास नहीं करना भी इन अधिकारियों द्वारा अपने कर्तव्य परायणता से मुंह मोड़ने जैसा कृत्य किया जाता रहा है।
– नए कलेक्टर से समाधान की उम्मीद
मुंगेली जिले में नए कलेक्टर की पदस्थापना के बाद आम लोगों को इस मामले में समाधान की उम्मीद जगी है। नागरिकों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन पंजीयन मुख्यालय के निर्देशों, राज्य सरकार के निर्णय और स्थानीय स्तर पर लागू की जा रही प्रक्रिया की समीक्षा कर स्थिति स्पष्ट करेगा।
लोगों की मांग है कि यदि किसी खसरे पर अवैध प्लाटिंग या अन्य कानूनी आपत्ति है तो उसका स्पष्ट रिकॉर्ड के आधार पर निराकरण किया जाए और जिन भूमियों पर कोई वैधानिक रोक नहीं है, उनकी रजिस्ट्री नियमानुसार तत्काल शुरू की जाए। इससे आमजन को राहत मिलने के साथ शासन को होने वाली संभावित राजस्व क्षति भी रोकी जा सकेगी।