संतोष सोनी चिट्टू
रतनपुर अखंड सौभाग्य की कामना का पर्व वटसावित्री रविवार और सोमवार को मनाया गया। शास्त्रानुसार कई साल बाद वट सावित्री और सोमवती अमावस्या एक साथ पड़ने के कारण इसे विशेष संयोग माना जा रहा है यही वजह है कि ज्यादातर महिलाएं सोमवार को ही वटसावित्री का व्रत रखें।
पंडित कौशल तिवारी ने बताया कि वैसे तो अमावस्या रविवार को दोपहर 2 बजकर 45 मिनट से शुरू हो जाएगा जो दूसरे दिन सोमवार को सायं 4 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। उन्होंने बताया कि सलो बाद सोमवार को वट सावित्री और सोमवती अमावस्या एक साथ पड़ रहा है पर्व के दोहरे योग के कारण सोमवार को व्रत रखना ज्यादा उचित हैं।
उन्होंने बताया कि वट सावित्री का पर्व पति के अखंड सौभाग्य की कामना के लिए मनाया जाता है इस दिन महिलाए व्रत रखकर बरगद और पीपल के वृक्ष को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी स्वरूप मानकार पूजा करते हैं। आमतौर पर यह पर्व दूसरे पहर में मनाया जाता है ।
सोमवार को व्रत रखने से सौभाग्यवती महिलाओं को वट सावित्री और सोमवती अमावस्या के व्रत का दोहरा पुण्य मिलेगा इस दिन महिलाए व्रत रख अपने पति की लंबी आयु के लिय बरगद और पीपल की पूजा करके भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी के स्वरूप की 108 परिक्रमा कर पूजा अर्चना करते है वही रतनपुर नगर की महिलाए सुबह से उठ कर सिंगार कर वट वृक्ष का परिक्रमा करते नजर आए