बिलासपुर:समाज सेवा के क्षेत्र में अलग ही मुकाम हासिल करने वाली बिलासपुर (बेलसरी) की बेटी व मुंगेली (पंडरभट्टा) की बहु अंकिता पांडे शुक्ला को इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इनका नाम दर्ज किया गया है।पिछले 6 वर्षों से समाज सेवा कार्य कर रहीं अंकिता ने पिछले 4 सालों में 50 से अधिक स्कूलों में जाकर बच्चों को यौन अपराधों को लेकर जागरूक करने का कार्य किया।
इसके अलावा गरीब व पिछड़े बस्ती में जा-जाकर उन्होंने महिलाओं व बच्चों को गुड टच-बैड टच, महिला व बच्चों सम्बन्धी अपराधों को लेकर जागरूक किया. उनके इस कार्य को देखते हुए इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने उन्हें प्रशस्ति पत्र व मेडल पहनाकर सम्मानित किया है।
गीतांजलि सिटी में रहने वाली अंकिता पांडेय शुक्ला शादी के बाद अपने ससुराल जबड़ापारा में रहकर भी यह काम जारी रखे हुए हैं। पूर्व में वे अकेले ही इस कार्य को कर रहीं थी, लेकिन कुछ समय पहले उन्होंने मार्मिक चेतना वेलफेयर सोसायटी की स्थापना कर अपनी टीम के साथ इस कार्य को आगे बढ़ा रहीं हैं।
उनके इस कार्य में उनके पति अनुभव शुक्ला भी उनका पूरा साथ देते हैं. समाज में कई महिलाएं ऐसी हैं जो मिशाल हैं।अपने प्रयास और कुछ अलग करने की सोच ने उन्हें खास और प्रेरक बना दिया है. बिलासपुर में ऐसी ही एक महिला है अंकिता पांडेय शुक्ला जिसकी सोच और प्रयासों ने समाज को नई दिशा और जागरूक करने का काम किया है।
अंकिता युवा समाजसेवी है और अंकिता ने यौन अपराध व नशे के गिरफ्त में जाते बच्चों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया है. अंकिता स्लम बस्तियों, झुग्गी झोपड़ियों और स्कूलों में जाकर आसान तरीके से बच्चों को जागरूक करती हैं. नशे व माहवारी को लेकर भी अंकिता अवेयरनेस कैंपेन चलाती हैं. उनके इस कार्य के लिए उन्हें उनके माता-पिता, सास, चारों बहनें लगातार प्रेरित कर रहें हैं।
नारी रत्न सम्मान से भी हो चुकी हैं सम्मानित-
बिलासपुर की अंकिता पांडेय ने बच्चों को अच्छे स्पर्श एवं पूरे स्पर्श यौन शोषण लैंगिक उत्पीड़न के लिए जागरूक करने के लिए नई सोच और नित नए प्रयासों से परहेज नहीं करतीं. बिलासपुर की झुग्गी झोपड़ी, स्लम बस्तियों, ग्रामीण इलाकों और स्कूलों में जाकर अंकिता बच्चों को आसान तरीकों से गुड टच और बैड टच के बारे में जागरूक करती हैं।
बच्चों के बीच अंकिता के प्रयासों का असर भी नजर आता है अलग सोच, मजबूत जज्बे और भरपूर हौसले की मिसाल बिलासपुर की अंकिता पांडेय को इस पर पिछले दिनों महामहिम राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके द्वारा नारी रत्न सम्मान से नवाजा जा चुका है।
कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही समाज सेवा से जुड़ गई अंकिता-
कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही अंकिता समाज के लिए कुछ अलग करने के लिए प्रेरित हुई। अंकिता ने इसके लिए यौन अपराध व नशे के खिलाफ जागरूकता को चुना। अंकिता ने देखा कि जागरूकता के अभाव में बच्चे यौन अपराध के शिकार हो रहे हैं और इसका सबसे ज्यादा असर स्लम बस्तियों और झुग्गी झोपडी में रहने वालेे बच्चों पर पड़ रहा है।
अंकिता ने इसके लिए जागरुकता मुहिम की शुरूवात की. इस कैंपेन के तहत अंकिता झुग्गी झोपड़ी, स्लम बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों व स्कूलों में जाकर वहां के बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में जागरूक करती है. इसके लिए वह ऐसे तरीके अपनाती हैं जो बच्चों को आसानी से समझ में आ जाए।इसके साथ ही लैंगिक उत्पीड़न, नशा मुक्ति समेत चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में भी वे जागरूक कर रही हैं।
लड़कियों को होने वाली शारीरिक दिक्कतों को लेकर भी लगातार उनका अभियान चल रहा है. भिक्षावृत्ति में सम्मिलित बच्चों को अंकिता द्वारा उचित सलाह परामर्श देकर चाइल्डलाइन को भी सुपुर्द किया जा रहा हैअंकिता का मानना है बचपन से बच्चों को यौन अपराध और नशे को लेकर जागरूक करना जरूरी है ताकि वे अपने साथ होने वाले यौन अपराध व नशे से होने वाले नुक़सान को लेकर जागरूक हो सकें. बहरहाल, अंकिता की यही सोच उन्हें समाज में खास बनाती है। वे आज समाज में महिलाओं के बीच मिसाल हैं।