Exclusive-विलुप्त होती धान की देसी किस्म को सहेज रहा कृषि का छात्र तरुण साहू

कृषि युग’ नाम से शुरू किया स्टार्टअप, वेबसाइट भी की तैयार

किसानों को निःशुल्क बीज देकर उत्पादन के लिए दे रहे बढ़ावा

डेढ़ सौ से अधिक धान की देसी किस्मों का संग्रहण

धान के साथ ही अरहर, कोदो-कुटकी की भी निकाली देसी किस्म

मुंगेली। किसान परिवार में जन्मे मुंगेली जिले के तरुण साहू (22) ने
विलुप्त होती धान के देसी किस्मों को सहेजने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने इसके लिए ‘कृषि युग’ नाम से स्टार्टअप भी शुरू किया है। साथ ही इसकी वेबसाइट भी तैयार की है. तरुण का मुख्य उद्देश्य देसी किस्मों का मार्केट फिर से तैयार करना है। नवागढ़ के किसान किशोर राजपूत के पास 125 प्रकार एवं तरुण के पास 25 प्रकार के धान की वैरायटी है। कुल डेढ़ सौ धान की वैरायटी को किसानों तक पहुंचा रहे हैं, ताकि स्वास्थ्य व स्वाद के लिए जाने जाने वाले चावल फिर से लोगों की थाली तक पहुंच सके। इसके साथ ही उन्हें किसानों से धान, गेहूं, दाल की और भी देसी किस्म मिल रही हैं। तरुण का कहना है कि 1970 में देश में डेढ़ लाख धान की वैरायटी थी, जो अब सिर्फ 6 सौ में ही सिमट कर रह गई है, जिसे बचाने के लिए कार्य किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ से एकमात्र युवा ने लगाया स्टॉल

बिलासपुर कृषि महाविद्यालय से बीएससी कृषि पास तरुण ने बताया कि बीते महीने उन्होंने दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में स्टॉल लगाकर धान, कोदो, कुटकी, अरहर की वैरायटियों की प्रदर्शनी लगाई थी। अपेडा संस्था के द्वारा उन्होंने यहां अपना स्टॉल लगाया था.छत्तीसगढ़ से एकमात्र तरुण ने ही इस ट्रेड फेयर में हिस्सा लिया था.इसके अलावा दिल्ली में आयोजित सेलर मीट में भी वे भाग ले चुके हैं।उनका कहना है कि कृषि महाविद्यालय बिलासपुर से उन्हें काफी सहयोग मिल रहा है. वे नवागढ़, मुंगेली, बिलासपुर, बलौदाबाजार के किसानों को बीज देकर उसकी खेती के लिए गाइडेंस दे रहे हैं।

दिल्ली से मिला कोदो-कुटकी का आर्डर

तरुण का कहना है कि लोग आज हाईब्रिड चावल के ज्यादा उत्पादन व आमदनी के चक्कर में देसी किस्म को भूलते जा रहे हैं. ऐसे में उन्होंने इसके लिए पहल शुरू की है. देसी किस्में में उनके पास लोकतीमांझी, तेलकस्तुरी, समुनचीनी, ब्लैक राइस, दुबराज, छत्तीसगढ़ देवभोग, जवाफूल सहित अन्य वैरायटियां हैं. अरहर की माकड़ी, घनी, माघी किस्म हैं। इसके अलावा गेहूं, कोदो-कुटकी की भी कई किस्म उन्होंने सहेजी हैं। दिल्ली व रायपुर से उन्हें कोदो-कुटकी व रागी का आर्डर मिला है।

कैंसर तक हो जाते हैं ठीक

देसी किस्म के कई चावल ऐसे हैं, जिनके सेवन से कई प्रकार की बीमारियां ठीक हो जाती हैं। गठवन,महामागी वैरायटी में रिसर्च हो चुका है कि इससे कैंसर जैसी बीमारीठीक हो जाती है। इसके अलावा ’12 साल’ किस्म में औसत से दोगुना जिंक व आयरन पाया जाता है। जवाफूल, लोकतीमांझी जैसे कई चावल खाने में सॉफ्ट व सुंगधित होते
हैं, जिनमें बहुत सी मेडिसिन प्रापर्टीज होते हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में देसी किस्म के कई चावलों में मेडिसिन प्रापर्टीज को लेकर रिसर्च भी चल रहा है।

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