मुंगेली। नगर पालिका में मचे सियासी घमासान के बाद मुंगेली भाजपा व विधायक पुन्नूलाल मोहले ने बाद में जिस ढंग से मुंगेली शहर के शांत माहौल खराब करने का काम किया उससे पहले भाजपा या विधायक पुन्नूलाल मोहले को न्यायालय से किसी भी नए शासन की कार्यवाही में रोक लगाने जाने से कौन रोका था। इस सम्बंध में मुंगेली नगर पालिका के जागरूक नागरिक मनीष शर्मा ने कहा कि मुंगेली नगर पालिका के बिना नाली निर्माण राशि आहरण घोटाले की चर्चा जब प्रदेश ही नही बल्कि पूरे देश मे हो रही है ऐसे में शासन ने पर्याप्त अवसर नगर पालिका के तत्कालीन अध्यक्ष संतुलाल सोनकर को अपना पक्ष रखने दिया उसके बाद शासन ने अपने अधिकारों व शक्तियों का प्रयोग कर कार्यकारी अध्यक्ष हेमेंद्र गोस्वामी को नियुक्त किया। इस नियुक्ति के बाद नए अध्यक्ष के कार्यभार व अन्य कार्यक्रमों में भाजपा व मीडिया के कुछ लोग संयुक्त रूप से कार्यक्रम की जानकारी भी स्वयं सोशल मीडिया के माध्यम से देते रहे बाद में भाजपा का फतवा जैसा कोई नया आदेश के बाद वही लोग नगर पालिका परिषद के सामने विरोध में आ गए। अब भाजपा का अचानक नगर पालिका परिसर के समक्ष हल्ला बोल सिर्फ माहौल खराब करने जैसा ही लग रहा है। जिला प्रशासन को वीडियो क्लिपिंग के आधार पर उन सभी पर मामला,मुकदमा दर्ज कराना चाहिए जिन्होंने शहर के वातावरण बिगाड़ने की कोशिश में शामिल रहे।
लाल डायरी का हो खुलासा,मोहले दे जवाब
बता दें मुंगेली नगर पालिका में जब भाजपा के नगर पालिका अध्यक्ष संतुलाल सोनकर बने उसके बाद समय समय पर खर्च,कमीशन व अन्य अवैधानिक स्रोत से प्राप्त धनराशि बंदरबांट होने की चर्चा है ऐसे में यदि कोई लाल डायरी अथवा लेनदेन हुआ है तब ऐसी स्थिति में भाजपा अथवा विधायक पुन्नूलाल मोहले को स्पष्ट करना चाहिए।
दोषी नही मगर नगर विकास के लिए सत्तारूढ़ दल का अध्यक्ष जरूरी
भाजपा का यह तर्क सामने आ रहा है कि भले ही तत्कालीन अध्यक्ष संतुलाल सोनकर ने नाली घोटाले में आरोपी हो उनके द्वारा नाली घोटाला किया अथवा नही किया गया हो लंबी फरारी के बाद भले ही जेल में निरुद्ध हो उसके बावजूद पद से नही हटाया जाना चाहिए ऐसे में राज्य शासन के जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि भले ही दोषी हो या ना हो मगर महीनों से फरारी व जेल में निरूद्ध रहने के अलावा उन्हें पर्याप्त अवसर पर अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया गया बावजूद असन्तुष्टता व नगर विकास को दृष्टिगत रखते हुए राज्य शासन ने नए कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का निर्णय लिया जिससे सत्तारूढ़ दल के कार्यकारी अध्यक्ष होने के बाद नगर पालिका के विकास कार्यो को किया जा सके।