बिलासपुर : तोरवा क्षेत्र में रेलवे कर्मचारी ने ठेकाकर्मी को कार्यालय सहायक की नौकरी लगाने का झांसा देकर चार लाख 50 हजार रुपये ले लिए। दो साल तक नौकरी नहीं लगने पर पीड़ित ने इसकी शिकायत तोरवा थाने में की। इस पर पुलिस जुर्म दर्ज कर मामले की जांच कर रही है। हेमूनगर में रहने वाले भरत यादव 2016 से रेलवे में ठेकाकर्मी का काम करते हैं। काम के दौरान 2019 में उनकी पहचान चीफ रेलवे रिजर्वेशन सुपरवाइजर आशीष पात्रो से हुई।
इसी बीच आशीष ने भरत और उसके दोस्त प्रकाश यादव को डीआरएम कार्यालय में बुलाया। उसने दोनों की रेलवे में कार्यालय सहायक की नौकरी लगवाने की बात कही। इसके लिए पांच लाख स्र्पये मांगे।
सितंबर 2019 में भरत ने अपने दोस्तों के साथ बैंक जाकर एक लाख 50 हजार स्र्पये निकलवाए। उसने अपने साथियों के सामने रकम आशीष को दे दी। इसके नौ दिन बाद ही उसने अपनी बहन के एफडी को तोड़कर रुपये आशीष के कार्यालय जाकर दे दिए।
साथ ही अपनी बहन पूजा यादव से एक लाख 10 हजार रुपये लेकर सुपरवाइजर को दिए। भरत की मां रामकली ने अपने परिचित हर्ष जायसवाल से 90 हजार स्र्पये उधार में लाकर दिए। इसे भी उसने आशीष को दे दिया। रुपये लेने के बाद आशीष का ओडिशा तबादला हो गया।
इस पर भरत ने मोबाइल में काल कर अपने रुपये वापस मांगे। तीन सालों से वह रकम लौटाने टालमटोल कर रहा था। पीड़ित ने इसकी शिकायत तोरवा थाने में की। इस पर पुलिस जुर्म दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि आशीष ने नौकरी लगवाने के नाम पर कई लोगों से रुपये लिए हैं। उसके खिलाफ 2018 में सिविल लाइन थाने में भी मामला दर्ज है। इसके अलावा कई लोगों ने उसके खिलाफ नौकरी लगवाने के नाम पर रुपये लेने की शिकायत की है। पुलिस इसकी जांच कर रही है।