बिलासपुर: हमेशा से विवादों में रहे तहसील कार्यालय की रीडर पर रिश्वतखोरी करने का मामला सामने आया है। रकम वसूली के इस मामले की शिकायत लेकर वकील के पास पहुंची, तब कलेक्टर ने उल्टा शिकायत करने वाली वकील को ही फटकार लगा दी। वकील का आरोप है कि कलेक्टर ने उन्हें पूछकर रुपए देने की बात कहते हुए जांच करने से इंकार कर दिया। इससे अधिवताओं का गुस्सा फूट गया और नाराज अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी और वकील गुरुवार दोपहर कलेक्टोरेट पहुंच गए और कलेक्टर के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे।
एडवोकेट सुधा गुप्ता ने बताया कि उनके क्लाइंट गंगाधर तिवारी ने अपने रिश्तेदार की मौत के बाद रिकार्ड सुधरवाने के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन जमा किया था। आरोप है कि नायाब तहसीलदार की रीडर प्रीति राजगीर ने नामांतरण और दस्तावेज दुरुस्त करने के एवज में 20 हजार रुपए की मांग की। 15 हजार देने के बाद भी नामांतरण आवेदन को 5 हजार के लिए पेंडिंग रखा गया। जब क्लाइन्ट ने 5 हजार और देने में असमर्थता जाहिर की तब रीडर ने उसके आवेदन को निरस्त कर दिया।
इस पर वकील सुगंधा ने इस मामले की शिकायत करने की बात कही। फिर वह शिकायत लेकर कलेक्टर ऑफिस पहुंच गई। अधिवक्ता सुगंधा गुप्ता का आरोप है कि कलेक्टर ने उनसे बदसलूकी करते हुए शिकायत पर कार्रवाई करने से मना कर दिया। महिला अधिवक्ता ने इस घटना की जानकारी जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों को दी।




तब अधिवक्ताओं की भीड़ कलेक्टोरेट पहुंच गई और कलेक्टर के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। वकीलों की भीड़ सीधे कलेक्टर कक्ष तक पहुंच गई। इस मामले की जानकारी लेने के लिए कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर से संपर्क करने की कोशिश की गई। लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
इस दौरान कलेक्टर कक्ष में कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर और पदाधिकारियों के बीच करीब घंटे भर तक बातचीत हुई। इसके बाद संघ के पदाधिकारी मीडिया से बात किए बिना ही चुपचाप लौट गए। आखिरकार कलेक्टर और वकीलों के बीच ऐसी क्या बात हुई या समझौता हुआ इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
एडवोकेट सुगंधा गुप्ता का दावा है कि उनके पास नायब तहसीलदार प्रकृति ध्रुव की रीडर प्रीति राजगीर का आडियो रिकार्डिंग भी है। जिसमें आवेदन को खारिज करने के बाद वह दोबारा उन्हें बुला रही हैं। लेकिन, सुगंधा उनसे बात करने के बजाए सीधे शिकायत लेकर कलेक्टर के पास पहुंच गई। लेकिन, कलेक्टर ने उनके साथ दुर्व्यवहार करते हुए शिकायत लेने से मना कर दिया।
बताया जा रहा है कि भूमाफिया जो जमीन संबंधित काम करते है उनका तहसील के अधिकारी-कर्मचारियों से अच्छा संबंध है। ऐसे रसूखदार भूमाफियाओं का नामांतरण एवं सीमांकन में कोई रुकावट नहीं होता। लेकिन, सामान्य आवेदकों का नामांतरण व सीमांकन में जानबूझकर विलंब किया जाता है।