बिलासपुर/कोरबा। देश में कोयले की कमी से जूझ रहे पावर प्लांट के लिए एसईसीएल से राहत की खबर निकलकर सामने आई है।
अपने निर्धारित लक्ष्य से पीछे चल रहे एसईसीएल की खदानों में अब कोयला उत्पादन में तेजी आ गई है। बता दें कि काेयला मंत्री प्रह्लाद जाेशी के दाैरे का असर न केवल जिले की काेयला खदानाें के उत्पादन पर पड़ा है, बल्कि एसईसीएल कंपनी का ओवर ऑल प्राेडक्शन भी बढ़ा है।
काेरबा क्षेत्र की चाराें परियाेजनाओं में प्रतिदिन औसत उत्पादन 65-70 हजार टन तक पहुंच
एसईसीएल के काेयला खदानाें से जिले की मेगा परियाेजनाओं में मानसून के चलते बनी परिस्थितियाें के दाैरान काेरबा, कुसमुंडा, दीपका व गेवरा खदान में प्रतिदिन औसत काेल प्राेडक्शन लगभग 65-70 हजार टन तक पहुंच रहा है।
बता दें कि मानसून कारणों के साथ ही खदान विस्तार की प्रक्रिया में विलंब, भू-विस्थापिताें से जुड़े मुद्दाें के कारण भी उत्पादन प्रभावित रहा। एसईसीएल अपना राेजाना का उत्पान लक्ष्य भी बढ़ा रहा है। एसईसीएल प्रतिदिन 4.75 लाख टन तक काेयला उत्पादन लक्ष्य के साथ काम कर रही है। हालांकि इसके मुकाबले अभी काेयला उत्पादन 3.22 लाख टन हाे रहा है, लेकिन पिछले कुछ दिनाें की अपेक्षा यह अधिक है।
पावर प्लांटाें में काेल स्टाॅक मेंटेन करने की काेशिश
काेयला मंत्री के दाैरे के बाद से बिजली प्लांटाें में काेयला आपूर्ति भी बढ़ाई जा रही है। इसके कारण प्लांटाें में काेल स्टाॅक में पहले से कुछ सुधार हुआ है। हालांकि प्लांटाें में काेल संकट पूरी तरह से नहीं टला है। जिले में पावर कंपनी के अधिकारियाें का कहना है कि पहले से स्टाॅक कुछ बढ़ा है, लेकिन समस्या पूरी तरह से दूर नहीं हुई है। प्लांटाें में काेल स्टाॅक मेंटेंन करने की काेशिश जारी है। इसके लिए अफसर भी जुटे हुए हैं।
अब तक 60.33 मिलियन टन उत्पादन
चालू वित्तीय वर्ष में एसईसीएल काे 172 मिलियन टन काेल प्राेडक्शन का टारगेट दिया है। कंपनी का अब तक काेयला उत्पादन लक्ष्य 77.85 मिलियन टन था। मगर इसके सापेक्ष उत्पादन 60.33 मिलियन टन हुआ।
वहीं काेल इंडिया की बात करें ताे चालू वित्तीय वर्ष में 670 मिलियन टन काेयला उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है। अभी तक 306.62 मिलियन टन काेल प्राेडक्शन करना था, लेकिन 275.52 मिलियन टन ही प्राेडक्शन हाे पाया। देश के करीब 20 फीसदी काेल प्राेडक्शन में एसईसीएल की भागीदारी है, जबकि एसईसीएल का करीब 80 प्रतिशत काेयला जिले की काेयला खदानाें से ही निकलता है।


