उच्च न्यायालय परिसर में स्थित महाधिवक्ता कार्यालय में अधिवक्ता संघ की आवश्यक बैठक हुई संपन्न

बिलासपुर/मुंगेली। तहसीलदार कार्यालय रायगढ़ में विगत दिनों घटित घटना के परिप्रेक्ष्य में तथा राजस्व न्यायालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार, अव्यवस्था एवं पीठासीन अधिकारियों का अधिवक्ताओं तथा पक्षकारों के साथ किये जाने वाला दुर्व्यवहार, के कारण प्रदेश के समस्त अधिवक्ताओं में स्वस्फूर्त उक्त घटना के पश्चात् से आकोश होने, प्रदेश के समस्त अधिवक्ता संघों द्वारा उक्त कारणों से आंदोलित होकर राजस्व न्यायालयों का बहिष्कार करने से आम जनमानस को हो रही परेशानी तथा राजस्व के प्रकरणों के निराकरण में हो रहे विलंब के मद्देनजर छ.ग. राज्य के अनेक अधिवक्ता संघो के प्रतिनिधियों की दिनांक 07.03.22 को माननीय महाधिवक्ता महोदय तथा राज्य अधिवक्ता परिषद छ.ग. के पदेन अध्यक्ष सतीश चंद्र वर्मा जी के छ.ग.उच्च न्यायालय परिसर में स्थित महाधिवक्ता कार्यालय में एक आवश्यक बैठक संपन्न हुई।

जिसमें सर्वसम्मति से निम्न मांगे आपके समक्ष रखी जा रही है:-

छ.ग. राज्य में अधिवक्ता सुरक्षा कानून (एडव्होकेट प्रोटेक्शन एक्ट) शीघ्र लागू किया जाये, जिसका ड्राफ्ट बनाकर पूर्व में ही विधि विधायी विभाग, माननीय विधि मंत्री एवं छ.ग. शासन को प्रेषित किया जा चुका है।

राजस्व न्यायालयों की न्यायिक शक्तियां को सिविल न्यायालयों में सुनवाई हेतु छ.ग. भू.रा.संहिता में आवश्यक संशोधन कर प्रावधानित किया जावे तथा इस संबंध में आवश्यक संशोधन शीघ्रताशीघ्र किया जाये।

छ.ग. प्रदेश के समस्त राजस्व अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा पूरे छ.ग. में बिना किसी अनुमति एवं बिना सूचना के तहसील कार्यालयों में दिनांक 11.02.22 एवं 12.02.22 को ताला बंदी कर कार्यालयीन कार्य बंद कर दिया गया, जो विधि विपरीत है, इसकी जांच कराकर दोषी व्यक्तियों के विरूद्ध दण्डात्मक एवं विभागीय जांच कार्यवाही किये जाने बाबत् आवश्यक दिशानिर्देश दिया जाये।

कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के प्रदेशाध्यक्ष के.के.लहरे तहसीलदार कोरबा द्वारा अधिवक्तों को अपमानित करने एवं उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से भारत देश के समस्त अधिवक्ताओं पर की गई आपत्तिजनक एवं मानहानि कारक टिप्पणी (जिसका विडियो रिकार्डिंग उपलब्ध है) पर उसके विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर उसे पद से बर्खाश्त किया जावे।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 के तहत् ठेका पद्धति से चल रहा वसूली का कार्य तत्काल बंद हो, एवं लोक सेवा केन्द्र समाप्त किया जाये।

राजस्व प्रकरणों का पंजीयन प्रकरण प्रस्तुती दिनांक को ही किया जावे, जो कि अभी नहीं होता है।

पूरे प्रदेश में प्रत्येक जिले स्तर पर एक कमेटी का गठन किया जाये, जिसके सदस्य के रूप में कलेक्टर संबंधित जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष, एक प्रतिष्ठित नागरिक सदस्य हों तथा उक्त कमेटी में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माननीय सचिव जो न्यायाधीश होते है को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में निवेदन कर रखा जाए, उक्त कमेटी की प्रतिमाह एक बैठक श्रीमान् कलेक्टर के कार्यालय में हो, जिसमें राजस्व न्यायालय से संबंधित विवादों एवं शिकायतों की जानकारी से कलेक्टर महोदय को अवगत कराया जाए।

कलेक्टर महोदय प्राप्त शिकायतों का निराकरण एवं उस पर की गई कार्यवाही के संबंध में अगली बैठक में जानकारी देवें, विवाद की स्थिति में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, विशेष आमंत्रित सदस्य उक्त संबंध में रिपोर्ट तैयार कर शासन एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रमुख माननीय महोदयों को निवेदन सहित अवगत करा सकें।

लोक सेवा गांरटी अधिनियम 2011 के तहत विहित समयावधि में राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया जावे, निराकरण न होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही किया जावे।


जिला अधिवक्ता संघ रायगढ़ के 5 अधिवक्ताओं के विरुद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरण छ.ग. शासन द्वारा वापस लेकर समाप्त कराया जाये।

रायगढ़ जिले में राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरूद्ध अधिवक्ताओं द्वारा की गई शिकायत पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर कार्यवाही की जावे।

एडव्होकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू होने से पूर्व किसी भी अधिवक्ता से पूर्व संबंधित अधिवक्ता संघ की सहमति के बिना प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं करना सुनिचित किया जावे।

जिस प्रकार समस्त शासकीय सेवकों को उनके एवं उनके परिवार के अस्वस्थ, रोगग्रस्त होने पर ईलाज हेतु शासकीय मद से ईलाज की व्यवस्था है, उसी प्रकार छ. ग. प्रदेश के समस्त अधिवक्ता एवं उनके परिवार, एवं अधिवक्ता लिपिकों की कैश-लैश ईलाज की व्यवस्था शीघ्र लागू करने हेतु आवश्यक निर्देश जारी हो।

अधिवक्ताओं की सेवाएं अति आवश्यक सेवाओं के अंतर्गत आती है, जिसके कारण उन्हें समय-समय पर संबंधित न्यायालय में पहुंचना होता है, इस कारण प्रदेश के समस्त अधिवक्ताओं के वाहनों को टोल टैक्स से छूट प्रदान की जावे।

छत्तीसगढ़ प्रदेश के अधिवक्तागण प्रदेश के अलग-अलग जिलों एवं उपखण्डों में जाते हैं, जहां शासन के विश्रामगृह, रिसार्ट, हो, वहां उन्हें शासकीय दर पर राशि प्राप्त कर रूकने ठहरने, भोजन की व्यवस्था उपलब्धतानुसार प्रदान करने संबंधी निर्देश जारी किया जावे।

छत्तीसगढ़ प्रदेश के समस्त अधिवक्ताओं की जीवन रक्षा हेतु सामूहिक जीवन बीमा पॉलिसी कराकर उन्हें सुरक्षित करने जिसमें पॉलिसी प्रीमियम का कुछ अंश संबंधित अधिवक्ता
से भी प्राप्त कर, पॉलिसी कर सुरक्षित करने संबंधी आवश्यक निर्देश प्रदान करने की कृपा हो।

छत्तीसगढ़ प्रदेश में ऐसे अधिवक्त्ता जो नया पंजीयन कराकर विधि व्यवसाय में प्रवेश करते हैं, उन अधिवक्ताओं को सहयोग राशि के रूप में मुख्यमंत्री कोष से मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण प्रोत्साहन राशि योजना बनाकर 25000/-रू. एक बार प्रदान करने संबंधी प्रावधानित कर प्रदान किया जाये, जिससे नया पंजीकृत अधिवक्ता, पंजीयन पश्चात् आवश्यक कानूनी किताबें, ड्रेस, आदि व्यवस्था कर सकें। ऐसे नये पंजीकृत अधिवक्ताओं को पंजीयन पश्चात् पांच वर्ष तक प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि प्रदान करने संबंधी निर्देश जारी हों।

प्रदेश के अधिवक्ताओं में ऐसे अधिवक्ता जो अत्यंत वृद्ध एवं असहाय है, शारीरिक रूप से असक्षम है, विधि व्यवसाय करने में सक्षम नहीं है, ऐसे अधिवक्ताओं को प्रतिमाह पैंशन प्रदान करने संबंधी व्यवस्था हो।

प्रदेश के अधिवक्ता संघों की मांग पर अधिवक्ताओं की आवास कॉलोनी हेतु शासकीय भूमि आबंटित कराने की कृपा करें।

राज्य के प्रत्येक न्यायालय परिसर में कार्य दिवस में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना कर वहां एक चिकित्सक व स्टॉफ एवं दवा उपलब्ध कराये जाने का आदेश दिया जावे।

राज्य के प्रत्येक न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं, पक्षकारों, विकलांगजनों महिला एवं पुरूषों के लिए व्यवस्थित शौचालय, पेयजल की व्यवस्था हेतु निर्देश जारी हो।

उक्त संपूर्ण मांगे अधिवक्ता हित में होने से, उक्त मांगों पर सद्भावनापूर्वक तथा सहानुभूति पूर्वक विचार कर संबंधित घोषणा एवं कियान्वयन कराये जाने का निवेदन है। जिससे प्रदेश के लगभग 30000 अधिवक्ता, परिवार एवं अधिवक्ता क्लर्क का परिवार सदैव आपका आभारी रहेगा।

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