- 30-35 वर्षों में मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र में करीब 100 एकड़ में अवैध प्लाटिंग होने का दावा, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मुंगेली। नगर पालिका क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। पिछले 30-35 वर्षों के दौरान शहर में बड़े पैमाने पर अवैध प्लाटिंग होने के आरोपों के बीच अब प्रशासन की कार्रवाई की निष्पक्षता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सवाल यह है कि यदि अवैध प्लाटिंग पर अंकुश लगाना प्रशासन की प्राथमिकता है, तो कार्रवाई केवल किसी व्यक्ति विशेष की शिकायत अथवा किसी चुनिंदा खसरे तक सीमित क्यों रहे? प्रशासन को राजस्व अभिलेखों, खसरा नंबरों और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर समग्र जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
मांग उठ रही है कि नवपदस्थ एसडीएम मायानंद चंद्रा अथवा नगर पालिका प्रशासन किसी शिकायत को आधार बनाकर सीधे कार्रवाई करने के बजाय शिकायत की तथ्यात्मक जांच करे। शिकायतकर्ता से शपथपत्र (हलफनामा) लेकर शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की पुष्टि कराई जाए, ताकि कार्रवाई ठोस तथ्यों पर आधारित हो और प्रशासनिक प्रक्रिया का दुरुपयोग न हो सके।
-शिकायत के आधार पर चुनिंदा कार्रवाई के बजाय हो निष्पक्ष जांच
मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र में पिछले तीन से साढ़े तीन दशकों के दौरान लगभग 100 एकड़ भूमि पर अवैध प्लाटिंग होने का दावा किया जा रहा है। यदि यह दावा सही है, तो इसकी जांच केवल किसी एक स्थान या व्यक्ति तक सीमित रखने के बजाय पूरे क्षेत्र में कराई जानी चाहिए। राजस्व रिकॉर्ड, खसरा अभिलेख और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर उन सभी मामलों की पहचान होनी चाहिए, जिनमें नियमों का उल्लंघन कर भूखंडों का विभाजन अथवा विक्रय किया गया।
अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध कार्रवाई के नाम पर केवल किसी विशेष स्थान पर पहुंचकर औपचारिक निरीक्षण या फोटो खिंचवाने तक सीमित रहने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कार्रवाई का आधार क्या है, जांच में किन तथ्यों की पुष्टि हुई और संबंधित मामलों में आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
शिकायतों के माध्यम से अधिकारियों पर दबाव बनाने, कार्रवाई का भय पैदा करने अथवा शिकायतों को बाद में वापस लेने के बदले अनुचित लाभ लेने जैसी आशंकाओं की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, ऐसे आरोपों की पुष्टि जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही की जानी चाहिए। शिकायतकर्ता से हलफनामा लेने की व्यवस्था भी कानून के अनुरूप और सभी मामलों में समान रूप से लागू होनी चाहिए, ताकि वास्तविक शिकायतकर्ताओं को अनावश्यक रूप से हतोत्साहित न किया जाए।
-35 वर्षों के रिकॉर्ड खंगाले, दोषियों की तय हो जवाबदेही
यदि जिला प्रशासन, एसडीएम और नगर पालिका प्रशासन अवैध प्लाटिंग के मामले में गंभीर हैं, तो उन्हें किसी व्यक्ति विशेष की शिकायत का इंतजार करने के बजाय उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के आधार पर व्यापक जांच की पहल करनी चाहिए। पिछले 30-35 वर्षों में नगर पालिका क्षेत्र में हुए भूमि विभाजन, भूखंडों के विक्रय, डायवर्जन और संबंधित अनुमतियों की जांच कर नियमों के उल्लंघन वाले मामलों को चिह्नित किया जाना चाहिए।
यदि जांच में अवैध प्लाटिंग अथवा अन्य अनियमितताओं के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रचलित कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इसमें किसी के पद, प्रभाव या सामाजिक प्रतिष्ठा को आड़े नहीं आने देना चाहिए।
शहर में लंबे समय से विकसित आवासीय और व्यावसायिक बसाहटों के संदर्भ में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि किन भूखंडों का विकास नियमानुसार हुआ और किन मामलों में नियमों का उल्लंघन किया गया। केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी मानने के बजाय दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है।
-दो वर्षों से रजिस्ट्री पर रोक, करोड़ों के राजस्व नुकसान का सवाल
मुंगेली में छोटे भूखंडों और डायवर्टेड जमीन की रजिस्ट्री को लेकर लंबे समय से बनी स्थिति भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि लगभग दो वर्षों से रजिस्ट्री संबंधी प्रतिबंधों और प्रक्रियागत अड़चनों के कारण आम नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इससे शासन को संभावित राजस्व नुकसान होने की आशंका भी जताई जा रही है।
ऐसे में नवपदस्थ एसडीएम मायानंद चंद्रा के पदभार ग्रहण करने के बाद इस समस्या के समाधान के लिए क्या पहल की गई, यह सार्वजनिक होना चाहिए। क्या राज्य सरकार के नियमों के अनुरूप पांच डिसमिल या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों तथा डायवर्टेड भूमि की रजिस्ट्री में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए कोई प्रस्ताव तैयार किया गया? क्या जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों के समक्ष इस विषय को उठाया?
इन सवालों पर प्रशासन को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। यदि राज्य स्तर पर लागू नियमों के बावजूद स्थानीय स्तर पर प्रक्रियागत अड़चनें बनी हुई हैं, तो उनकी समीक्षा कर समाधान निकाला जाना चाहिए। जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को भी राजस्व संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिए अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके।
-नियमों का सख्ती से पालन हुआ तो कई पुराने मामले आएंगे सामने
शहर में वर्षों से विकसित आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि सभी मामलों में वर्तमान नियमों के अनुरूप सख्त कार्रवाई की जाए, तो बड़ी संख्या में पुराने मामलों की जांच करनी पड़ सकती है। आरोप है कि अवैध प्लाटिंग की गतिविधियां लंबे समय तक चलती रहीं और कई लोगों ने इससे लाभ उठाया।
ऐसे में प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अतीत में इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश क्यों नहीं लग पाया। संबंधित विभागों के पास भूमि संबंधी अभिलेख, नक्शे और अन्य जानकारियां उपलब्ध होने के बावजूद यदि नियमों का उल्लंघन होता रहा, तो इसकी प्रशासनिक समीक्षा भी जरूरी है।
यह भी जांच का विषय है कि संबंधित मामलों में नगर पालिका और राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका क्या रही। हालांकि, किसी अधिकारी की मिलीभगत अथवा लापरवाही का निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जाना चाहिए।
यदि नियमों का उल्लंघन कर प्लाटिंग किए जाने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, जहां लंबे समय से आवासीय बसाहट विकसित हो चुकी है, वहां नागरिकों के हितों, वैधानिक स्थिति और लागू नियमों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
-सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतों की विश्वसनीयता की भी हो जांच
मुख्यमंत्री जन शिकायत पोर्टल आम नागरिकों को अपनी समस्याएं शासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। लेकिन किसी भी शिकायत प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और निराधार आरोपों के आधार पर अधिकारियों या अन्य व्यक्तियों पर अनुचित दबाव न बनाया जाए।
मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र में शिकायत पोर्टल के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि कुछ लोग शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया का इस्तेमाल स्थानीय अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए करते हैं। हालांकि, किसी शिकायत को केवल आरोपों के आधार पर झूठा नहीं माना जा सकता। उसकी सत्यता का निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर होना चाहिए।
प्रशासन को शिकायतों की समयबद्ध समीक्षा करनी चाहिए। यदि कोई शिकायत जानबूझकर झूठे तथ्यों के आधार पर दर्ज कराई गई है और उसके पीछे अनुचित उद्देश्य होने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी ओर, वास्तविक शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
-प्रशासन स्पष्ट करे अपना रुख, पारदर्शिता से दूर हो संदेह
मुंगेली में अवैध प्लाटिंग, रजिस्ट्री संबंधी अड़चनों और शिकायतों के कथित दुरुपयोग से जुड़े मुद्दों पर अब जिला प्रशासन को स्पष्ट रुख अपनाने की जरूरत है। कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष की शिकायत तक सीमित रहने के बजाय नियमों, दस्तावेजों और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए।
यदि अवैध प्लाटिंग के पुराने मामलों की जांच आवश्यक है, तो इसके लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए। राजस्व अभिलेखों की समीक्षा हो, संबंधित अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट की जाए और जहां उल्लंघन प्रमाणित हो, वहां कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की निष्पक्षता का प्रमाण केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समान परिस्थितियों में सभी मामलों पर समान नियम लागू करना भी है। शिकायतकर्ता की जवाबदेही, अधिकारियों की जिम्मेदारी और अवैध प्लाटिंग में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कार्रवाई—इन सभी पहलुओं पर पारदर्शिता ही जनता का भरोसा कायम कर सकती है।