बिलासपुर: देश की सर्वोच्च अदालत ने सरकारी दफ़्तरों के साथ निजी कार्य स्थलों पर भी महिला कर्मचारियों के साथ किस तरह का व्यवहार ग़ैर क़ानूनी है और उनके सम्मान की रक्षा कैसे होगी पर लंबी सूची जारी की और इसे कार्यस्थल पर प्रदर्शित करना अनिवार्य है।
इन सब प्रयास के बावजूद महिलाओं को कार्य स्थल पर परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। बिलासपुर स्वास्थ्य विभाग में कुष्ठ उन्मूलन कार्यालय के कर्मचारी के ख़िलाफ़ महिला कर्मचारियों को शिकायत दर्ज करवाने के लिए सुबह 11 बजे से 2 बजे तक डटी रही तब उनकी शिकायत और बयान लिया गया। शिकायतकर्ताओं ने कहा है की कर्मचारी यौनरंजित फब्तियां लक्षित करके महिला कर्मचारी के स्वाभिमान को ठेस पहुँचाता है। उदाहरण “आपके रजिस्टर का तो बलात्कार हो गया है”


ऐसे एक नही कई वाक्य शिकायतकर्ताओं ने अपने बयान में दर्ज करवाए है। शर्मनाक बात तो यह है कि ऐसे विकृत मानसिकता वाले पुरुष कर्मचारी को बचाने का प्रयास एक महिला डॉक्टर जो पूर्व स्वास्थ्य राज्य मंत्री की बहन के द्वारा किया जा रहा है।
इनकी पद नियुक्ति तबादले को लेकर भी कई तथ्यात्मक कहानियाँ उबलब्ध है जिनपर समाचार पृथक से लिखा जाएगा। उक्त मामले की शिकायत पर सुनवाई करने में सीएमएचओ द्वारा लापरवाही की जा रही है शिकायतकर्ताओं को जानबूझ कर लंबे समय तक इंतज़ार कराया जाता है ।
उद्देश्य शिकायतकर्ता के स्वाभिमान को नीचे गिराना रहता है। नियमानुसार प्रत्येक सरकारी कार्यालय में विशाखा कमेटी का गठन आवश्यक है ताकि पीड़ित महिलाएँ अपनी पीड़ा व्यक्त कर शिकायत दर्ज करा सके। लेकिन जिस कार्यालय में महिलाओं को फ़र्ज़ी शिकायत कर डराया, धमकाया जाता है वहाँ पर विशाखा कमेटी क्यों कर गठित होगी।
यह मामला महिला आयोग में शिकायत का बनता है याद रहे डॉक्टर प्रमोद महाजन के कार्यालय और ब्लाक़ो में कार्यरत महिलाओं, तृतीय वर्ग, चतुर्थ वर्ग, संविदा एवं नैमितिक कर्मचारियों के ख़िलाफ़ अधिकारी और कर्मचारियों का व्यवहार बिल्कुल भी उचित, सहज और आदरयुक्त नही है। सीएमएचओ में शिकायत करते ही पीड़ित महिला कर्मचारियों ने त्वरित करवाई की माँग की है।
वैसे भी ज़िला कुष्ठ अधिकारी के ख़िलाफ़ समय-समय पर शिकायतें होती रहती है।
राज्य महिला आयोग द्वारा कई बार कहने के बाद भी राज्य के कार्यालयों में न तो विशाखा कमेटियाँ बनी है और न ही नही महिला अपराधों/ शिकायतों से सम्बंधित डिस्प्ले बोर्ड और सिटीजन चार्टर प्रदर्शित किया गया है। नियमानुसार महिलाओं और बच्चों से सम्बंधित क़ानूनों को डिस्प्ले और टोल फ़्री हेल्पलाइन नम्बर प्रदर्शित करना आवश्यक है। लेकिन हमारा ज़िला इन क़ानूनों से परे और ऊपर है।