
हम महिलाएं
हम शूरवीर महिलाएं हैं
ना डरती है ना मरती है
आये कितनी भी बाधाएं
हम हिम्मत से सह लेती हैं
रूप अनेक हम स्त्री के
हम जननी हैं माताएं हैं
हम बहने हैं उन वीरों की पत्नी भी हम कहलाती हैं
वात्सल्य भरा है सबके लिए फिर भी अबला कहलाती है तब रुप अनेक लेकर के महाकाली दुर्गा बन जाती है
कदर करो हर नारी की
क्योंकि, आन बान शान
सब नारी से है
नारी ना होती इस दुनिया में तो?
सोचो क्या होता?
नारी की कद्र करो सब
नारी से घर स्वर्ग बनता जिस घर में नारी ना हो तो वह घर भी घर कहां होता है।
- स्वरचित मौलिक कविता
श्रीमती उमा शर्मा, नागपुर