रानी निषाद की कलाकृति गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

रायपुर – राजधानी से लगे गोबरा नवापारा की सुश्री रानी निषाद द्वारा धान , सब्जी के बीज , मूंग , चांवल , चने सहित बीस हजार से अधिक के बीजों के साथ गाय के गोबर का प्रयोग करते हुये विभिन्न प्रकार की इको फ्रेंडली राखियां तैयार की गई हैं। जिसे देखते हुये सोनल राजेश शर्मा ने गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में रानी निषाद को उनके कलाकृति बनाने को लेकर रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित किया। इससे निषाद समाज के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ का भी नाम रोशन हुआ है।


इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये पांच बहन और दो भाईयों में रिकॉर्ड होल्डर रानी निषाद ने चर्चा के दौरान अरविन्द तिवारी को बताया कि गरीब घर की लड़की होने के कारण बचपन में वह अपनी मां के साथ पापड़ी और लड्डू बेचने का काम करती थी। वह बीएससी (गणित) और पीजीडीसीए की पढ़ाई की है। विगत वर्ष भारत- चीन के बीच विवाद के समय जब चाईना माडल के विरोध का स्वर उठा तभी उनके मन में ख्याल आया कि हमें भी स्वदेशी सामान बनानी चाहिये। फिर उन्होंने सबसे पहले मात्र छह ईको फ्रेंडली राखी तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल की। उसे देखकर सभी ने पसंद किया और उनका उत्साहवर्धन करते हुये अधिक मात्रा में बनाने की सलाह दी।

इसके बाद बैंक से लोन ना मिलने पर उन्होंने अपनी मां के गहने गिरवी रखकर धान , चांवल , कोदो एवं राहल , मूंग सहित सभी दाल और बीजों का समावेश करते हुये इको फ्रेंडली राखी तैयार की। सड़कों में भी इनकी खूब बिक्री हुई और यहीं से इनकी प्रोडक्ट बनाने की सिलसिला आगे बढ़ी। राखी में अपार सफलता हासिल करने के बाद रानी ने कुछ छात्राओं और महिलाओं का ग्रुप बनाकर गोबर से ही गमला , दीपक , फ्रेम , शिवलिंग , बैल सहित सैकड़ों प्रोडक्ट बनाना शुरू की। इनके समूह द्वारा निर्मित इन प्रोडक्टों की मांग अन्य राज्यों के अलावा सात समंदर पार अमेरिका में भी हो रही है। विगत दिनों छग के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी कलाकृति को लेकर उनका सम्मान किया था।

रानी ने बताया कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। उनका उद्देश्य धान सहित प्रदेश की संस्कृति को कलाकृति के माध्यम से विश्व स्तर तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि हमारे प्रोडक्ट में बीज है तो खाद की भी जरूरत पड़ेगी इसलिये हमने हर प्रोडक्ट में गोबर का प्रयोग किया है। प्रोडक्ट का प्रयोग हो जाने के बाद बीज और खाद दोनो के समावेश से पुन: एक नया वृक्ष बनेगा , इससे हमारी प्रकृति की भी सुरक्षा होगी। रानी ने बताया कि उनकी कच्ची मकान होने के कारण कई बार बारिश में उनके बनाये प्रोडक्ट खराब हो जाते हैं तो कभी चूहे नष्ट कर देते हैं , जिससे उन्हें काफी नुकसान भी उठाना पड़ता है।

रानी की सोच का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह अपने गली – मुहल्ले , गांव एवं आसपास के बच्चों और अन्य महिलाओं को भी अपनी कला को सिखाना चाहती है। ताकि अन्य महिलायें भी सशक्त मजबूत आर्थिक रूप से दृढ़ और मजबूत बन सके। अंत मे रानी ने समाज को संदेश देते हुये कहा कि परिस्थिति चाहे जैसी भी हो , कभी हार ना मानें। आप हर वो काम कर सकते हैं जो कोई नही कर सकता। आज समाज को सफल इंसान के साथ-साथ एक अच्छे इंसान की भी आवश्यकता है इसलिये हमें पाज़िटिव सोच बनाये रखें।

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