अंतरराष्ट्रीय साहित्य समीक्षा संगोष्ठी वेबिनार में  छत्तीसगढ़ी का संपूर्ण व्याकरण मानक दिग्दर्शिका  की हुई समीक्षा

रघु यादव की रिपोर्ट

मस्तूरी:-  शासकीय पातालेश्वर महाविद्यालय मस्तूरी एवं प्रयास साहित्य प्रकाशन बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्य समीक्षा संगोष्ठी वेबिनार में  ‘ *छत्तीसगढ़ी का संपूर्ण व्याकरण* ‘ मानक दिग्दर्शिका पर पुस्तक समीक्षा की गई । इस पुस्तक की उपयोगिता व लोक प्रियता ही है कि 2021 में ही इसके द्वितीय संस्करण आ गये । लेखक द्वय डॉ विनय कुमार पाठक व डॉ विनोद कुमार वर्मा ने छत्तीसगढ़ी का संपूर्ण व्याकरण की रचना करके व्याकरणाचार्यों, छत्तीसगढ़ी लेखक साहित्यकार, विद्वानों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं के पर्याप्त बेहतर सामग्री देने का वितान किया है ।

मुख्य अतिथि डॉ चंद्रशेखर शेखर सिंह ने पुस्तक समीक्षा में कहा इस पुस्तक की विशेषता है 137 वर्ष पूर्व लिखे हीरालाल काव्योपाध्याय की छत्तीसगढ़ी व्याकरण में प्राचीन छत्तीसगढ़ी शब्द प्रयोग को इस अंचल के पढ़ें लिखे शिक्षित सुसंस्कृत समाज के अनुरूप नवीन कलेवर में प्रस्तुत किया जाए जैसे प्रसाद को परसाद, पवित्र को पवितर , प्रकाश को परकास  , प्राणी शास्त्र को परानी सास्तर  जैसे तोड़ मरोड़कर लिखना उचित नहीं है । लेकिन हमारे बहुप्रचलित मूल छत्तीसगढ़ी शब्दों का यथोचित प्रयोग पर जोर देना होगा ताकि छत्तीसगढ़ी शब्द सौंदर्य का लालित्य बना रहे जैसे प्रकाश को अंजोर ,वर्ष को बछर ,  पुत्री पुत्र को नोनी -बाबू कहना उपयुक्त है । बच्चों को लईका  कहना आदि ।


इस महत्वपूर्ण साहित्यिक समीक्षा संगोष्ठी  ख्यातिलब्ध भाषाविद , हिंदी समीक्षक  छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ विनय कुमार पाठक ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि निश्चित रूप से यह पुस्तक छत्तीसगढ़ी शब्द प्रयोग  के भ्रमपूर्ण स्थिति को दूर करेगा अपितु व आधुनिक छत्तीसगढ़ी रूप को सशक्त व समृद्ध बनायेगा

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